India-Philippines BrahMos Deal: भारत और फिलीपींस के बीच ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों की एक बड़ी डिफेंस डील पर बातचीत अंतिम चरण में पहुंच गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, फिलीपींस भारत से करीब 60 और ब्रह्मोस मिसाइलें खरीदने की तैयारी कर रहा है। इस संभावित समझौते की कीमत 700 से 800 मिलियन डॉलर यानी लगभग 6,300 से 7,200 करोड़ रुपये हो सकती है। यह सौदा आगे बढ़ता है तो दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत के रक्षा निर्यात को एक और बड़ी मजबूती मिल सकती है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी Reuters की 5 नवंबर की रिपोर्ट के अनुसार, इस संभावित खरीद में ब्रह्मोस के करीब पांच नए सिस्टम शामिल हो सकते हैं। मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों के मुताबिक, भारत और फिलीपींस के बीच बातचीत अपने अंतिम चरण में है। हालांकि, अभी इस नए समझौते पर आधिकारिक हस्ताक्षर नहीं हुए हैं।
फिलीपींस क्यों खरीदना चाहता है 60 और ब्रह्मोस मिसाइलें?
फिलीपींस पिछले कुछ वर्षों से अपनी सैन्य ताकत और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने में जुटा है। खासकर दक्षिण चीन सागर में चीन के साथ बढ़ते क्षेत्रीय विवादों के बीच मनीला अपनी तटीय रक्षा क्षमताओं को आधुनिक बनाना चाहता है।
इसी रणनीति के तहत फिलीपींस भारत से अतिरिक्त ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम खरीदने पर विचार कर रहा है।
Reuters के मुताबिक, फिलीपींस के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता आर्सेनियो एंडोलोंग ने बताया कि राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर ने भी अतिरिक्त ब्रह्मोस मिसाइलें खरीदने की इच्छा जताई है।
वहीं, फिलीपींस के रक्षा सचिव गिल्बर्टो थियोडोरो ने 5 नवंबर को दिल्ली डिफेंस डायलॉग में वर्चुअल संबोधन के दौरान कहा कि उनका देश ब्रह्मोस सिस्टम की संख्या बढ़ाना चाहता है। उन्होंने भारतीय अधिकारियों के साथ अपनी जरूरतों से जुड़ी एक ‘विश लिस्ट’ भी साझा की है, ताकि मिसाइल सिस्टम को फिलीपींस की भौगोलिक और सैन्य परिस्थितियों के अनुसार बेहतर बनाया जा सके।
2022 में भी भारत से खरीदी थीं ब्रह्मोस मिसाइलें
भारत और फिलीपींस के बीच रक्षा सहयोग की शुरुआत इस समझौते से पहले भी हो चुकी है।
जनवरी 2022 में दोनों देशों के बीच करीब 375 मिलियन डॉलर का ब्रह्मोस मिसाइल समझौता हुआ था। यह फिलीपींस का भारत से ब्रह्मोस सिस्टम खरीदने का पहला बड़ा रक्षा सौदा था।
अब भारत उस समझौते के तहत मिसाइलों की डिलीवरी पूरी करने के करीब है। इसी बीच फिलीपींस की ओर से अतिरिक्त पांच ब्रह्मोस सिस्टम खरीदने में दिलचस्पी दिखाई गई है।
प्रस्तावित नया समझौता पिछले सौदे की तुलना में काफी बड़ा हो सकता है। अगर 700 से 800 मिलियन डॉलर की यह डील पूरी होती है, तो भारत और फिलीपींस के बीच रक्षा साझेदारी को नई दिशा मिल सकती है।
क्या है ब्रह्मोस मिसाइल और क्यों है इसकी इतनी मांग?
ब्रह्मोस भारत और रूस के संयुक्त सहयोग से विकसित की गई सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है। इसका नाम भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मोस्कवा नदी के नाम पर रखा गया है।
यह दुनिया की सबसे तेज क्रूज मिसाइलों में शामिल है। इसकी खासियत यह है कि इसे अलग-अलग प्लेटफॉर्म से लॉन्च किया जा सकता है। इनमें जमीन पर आधारित लॉन्चर, युद्धपोत और लड़ाकू विमान शामिल हैं।
ब्रह्मोस को खास तौर पर अपनी तेज गति, सटीक निशाना लगाने की क्षमता और अलग-अलग सैन्य परिस्थितियों में इस्तेमाल की उपयोगिता के लिए जाना जाता है।
यही वजह है कि भारत अब इस मिसाइल सिस्टम को अंतरराष्ट्रीय रक्षा बाजार में भी अपनी महत्वपूर्ण पेशकश के रूप में आगे बढ़ा रहा है।
दक्षिण चीन सागर में तनाव और फिलीपींस की रणनीति
दक्षिण चीन सागर एशिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्रों में से एक है। इस क्षेत्र में चीन और फिलीपींस के बीच समुद्री सीमाओं और क्षेत्रीय दावों को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है।
यह समुद्री क्षेत्र व्यापार और अंतरराष्ट्रीय नौवहन के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में फिलीपींस अपनी समुद्री सीमाओं की निगरानी और तटीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सैन्य आधुनिकीकरण पर ध्यान दे रहा है।
ब्रह्मोस जैसी एंटी-शिप क्षमता वाली मिसाइलें इस रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। हालांकि, प्रस्तावित खरीद का अंतिम स्वरूप और सिस्टम की तैनाती से जुड़ी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
भारत के डिफेंस एक्सपोर्ट को मिल रही नई पहचान
भारत पिछले कुछ वर्षों में हथियारों और रक्षा उपकरणों के निर्यात को बढ़ाने पर लगातार काम कर रहा है। ब्रह्मोस मिसाइल इस रणनीति का एक प्रमुख हिस्सा बन चुकी है।
फिलीपींस के अलावा भारत ने इंडोनेशिया को भी ब्रह्मोस मिसाइलों की आपूर्ति की घोषणा की है और वियतनाम के साथ भी इस क्षेत्र में समझौता किया है।
Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, भारत संयुक्त अरब अमीरात, थाईलैंड, दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील समेत कई अन्य देशों के साथ भी ब्रह्मोस सिस्टम की संभावित बिक्री को लेकर बातचीत कर रहा है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2026 में समाप्त वित्त वर्ष के दौरान भारत का रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यह पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 62 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि थी।
भारत-फिलीपींस डिफेंस डील क्यों है महत्वपूर्ण?
फिलीपींस के साथ प्रस्तावित यह समझौता सिर्फ मिसाइलों की बिक्री तक सीमित नहीं है। यह भारत की बढ़ती रक्षा विनिर्माण क्षमता और दक्षिण-पूर्व एशिया में उसके रक्षा सहयोग के विस्तार को भी दर्शाता है।
एक तरफ फिलीपींस अपनी समुद्री सुरक्षा मजबूत करना चाहता है, तो दूसरी तरफ भारत अपने स्वदेशी रक्षा उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।
हालांकि, 60 ब्रह्मोस मिसाइलों की खरीद और 700 से 800 मिलियन डॉलर की अनुमानित डील अभी बातचीत के स्तर पर है। अंतिम समझौते और आधिकारिक घोषणा के बाद ही इसकी वास्तविक कीमत, डिलीवरी और सिस्टम से जुड़ी पूरी जानकारी स्पष्ट हो सकेगी।
