ओवरलोडिंग पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: सिर्फ जुर्माना भरकर आगे नहीं जा सकते वाहन, अतिरिक्त भार उतारना हुआ अनिवार्य

सुप्रीम कोर्ट ने वाहनों की ओवरलोडिंग पर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया है कि ओवरलोड गाड़ियां अब सिर्फ चालान भरकर आगे नहीं बढ़ सकेंगी। टोल प्लाजा या चेकपोस्ट पर पकड़े जाने पर अतिरिक्त भार मौके पर ही उतारना होगा। मोटर वाहन अधिनियम की धारा 136ए के तहत वे-इन-मोशन सिस्टम से सख्त निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।

Overloading Vehicle Rules in India: सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के राजमार्गों पर ओवरलोडिंग की समस्या को गंभीर खतरा स्पष्ट निर्देश दिया कि कोई भी ओवरलोड ट्रक या वाणिज्यिक वाहन केवल चालान या जुर्माना भरकर आगे नहीं जा सकता। वाहन को तभी छोड़ा जाएगा जब उसका अतिरिक्त भार मौके पर ही उतार दिया जाए। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने कहा है, केवल चालान काटकर ओवरलोड ट्रकों को छोड़ देना कानून के उद्देश्य को खत्म नहीं करता है।

क्या है पूरा मामला

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की 2019 से 2023 की पांच वर्षों की रिपोर्ट ने ओवेरलोडिंग से होने वाले दुर्घटनाएं को उजागर हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, वाहनों के अत्यधिक भार के कारण देश में 1,40,945 भीषण सड़क दुर्घटनाएं हुईं। इन हादसों में कुल 60,082 लोगों ने अपनी जान गंवाई, जो यह साबित करता है कि ओवरलोडिंग सड़कों पर संरचनात्मक नुकसान के साथ-साथ नागरिकों के जीवन के लिए भी गंभीर खतरा है।

जिसके बाद यह रिपोर्ट अधिवक्ता के.सी. जैन ने केरल उच्च न्यायालय में एक समान मामले की सुनवाई के दौरान प्रस्तुत की गई थी। जिसमे बताया गया था यह इस मामले में नियम को केवल कागजों पर सिमटी रही और जमीनी स्तर पर लागू नहीं हुई।

जिसका बाद कोर्ट ने कई प्रमुख दिशा-निर्देश जारी किया।

अनिवार्य अनलोडिंग और दोबारा माप: कोर्ट ने साफ किया कि चाहे वाहन टोल प्लाजा, चेकपोस्ट या सड़क पर किसी प्रवर्तन स्थल पर पकड़ा जाए, जांच के स्थान से उसे तब तक आगे नहीं बढ़ने दिया जाएगा जब तक अतिरिक्त भार उतरवाकर उसका पुन: भार न मापा जाए।

इलेक्ट्रॉनिक प्रवर्तन (Electronic Enforcement): कोर्ट ने ‘वे-इन-मोशन’ और वे-ब्रिज सिस्टम को मोटर वाहन अधिनियम की धारा 136ए और केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के नियम 167ए के तहत इलेक्ट्रॉनिक प्रवर्तन प्रणाली से तुरंत एकीकृत करने का आदेश दिया।

एनएचएआई एसओपी का क्रियान्वयन: एनएचएआई द्वारा तैयार की गई मानक कार्यप्रणाली को पूरे देश में सख्ती से लागू किया जाएगा और वजन जांच व जब्ती का डिजिटल डेटाबेस रखा जाएगा।

पुलिस सुरक्षा और जवाबदेही: राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया गया है कि वे एनएचएआई और सड़क सुरक्षा अधिकारियों को प्रवर्तन के दौरान आवश्यकता पड़ने पर त्वरित पुलिस सहायता मुहैया कराएं।

ओवरलोडिंग पर क्या कहता है नियम (Overload Vehicle Rules in India)

मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 और केंद्रीय मोटर वाहन नियम के तहत ओवरलोडिंग को केवल एक सामान्य यातायात उल्लंघन नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा और सार्वजनिक संपत्ति के लिए गंभीर अपराध माना गया है।

मोटर वाहन अधिनियम, 1988 (संशोधित 2019)

मोटर वाहन अधिनियम, 1988 (संशोधित 2019) की धारा 194(1) के अनुसार वाहन में निर्धारित भार क्षमता से अधिक माल पाए जाने पर न्यूनतम ₹20,000 का जुर्माना लगाया सकता है। इसके अलावा, तय सीमा से जितना टन अतिरिक्त भार होगा, उस पर ₹2,000 प्रति टन की दर से अतिरिक्त जुर्माना वसूला जाता है। इसके अलावा कानून स्पष्ट कहता है कि जब तक वाहन चालक या मालिक अपने खर्च और अपने जोखिम पर अतिरिक्त भार नहीं उतार देता, तब तक वाहन को जांच स्थल से आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। अनलोड किए गए सामान की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी ट्रांसपोर्टर/चालक की ही होती है, प्रशासन की नहीं।

धारा 136ए (Section 136A) और नियम 167ए

वर्ष 2019 के संशोधन के तहत जोड़ी गई धारा 136ए तकनीकी निगरानी का अधिकार देती है कि नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे और व्यस्त शहरी चौराहों पर स्पीड कैमरे, सीसीटीवी, ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन और वे-इन-मोशन सिस्टम लगाना अनिवार्य है। नियम 167ए के तहत यदि कोई वाहन बिना रुके तय सीमा से अधिक भार लेकर गुजरता है, तो इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के आधार पर सीधे वाहन मालिक के नाम पर डिजिटल चालान जारी किया जा सकता है ।

NHAI और टोल प्लाजा के नियम

टोल प्लाजा पर स्थापित वे-ब्रिज और वे-इन-मोशन सिस्टम के लिए स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) है। राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियमों के अनुसार, यदि कोई ओवरलोड वाहन टोल प्लाजा पर पकड़ा जाता है, तो उसे सामान्य टोल दर के अलावा दंडात्मक रूप से 10 गुना अतिरिक्त टोल शुल्क देना पड़ता है। इसके अलावा टोल प्लाजा पर अतिरिक्त भार खाली कराने के लिए विशेष सुरक्षित स्थान का भी प्रावधान है, और वजन सामान्य होने के बाद ही वाहन को लेन पार करने दी जाए।

चालक के लाइसेंस और वाहन के परमिट पर प्रभाव

ओवरलोडिंग के मामले में वाहन चालक का ड्राइविंग लाइसेंस कम से कम 3 महीने के लिए निलंबित किया जा सकता है। और बार-बार ओवरलोडिंग करने पर वाहन का वाणिज्यिक परमिट और फिटनेस सर्टिफिकेट रद्द करने का प्रावधान है।

फिर सुप्रीम कोर्ट को आदेश क्यों देना पड़ा?

यद्यपि कानून में पहले से ही अतिरिक्त भार उतारने का प्रावधान मौजूद था, लेकिन जमीनी हकीकत यह थी किटोल प्लाजा और चेकपोस्टों पर अधिकारी सिर्फ भारी जुर्माना या 10 गुना टोल वसूलते थे और रसीद देकर ओवरलोड ट्रक को छोड़ देते थे। ट्रांसपोर्टर इसे ‘रास्ते का खर्च’ मानकर ओवरलोडिंग बंद नहीं कर रहे थे। इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि इस कानूनी नियम को कड़ाई से लागू कराया जाए।

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