01 October News Analysis: देश में प्रशासनिक नीतियों, शासन व्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा और जनहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले सामने आए हैं। आज के इस दैनिक बुलेटिन में हमारा मुख्य फोकस INDIA गठबंधन का Save Democracy March और ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-3 को मंजूरी पर है। इसके साथ ही दिन के अन्य 5 सबसे अहम राष्ट्रीय घटनाक्रमों की तथ्यात्मक बैकस्टोरी, कानूनी व संवैधानिक संदर्भ और आम नागरिकों पर उनके संभावित असर का निष्पक्ष व बिंदुवार विश्लेषण नीचे विस्तार से पढ़ें।
INDIA गठबंधन का लोकतंत्र बचाओ मार्च, 2 से 8 अक्टूबर तक देशव्यापी प्रदर्शन, 6 को चुनाव आयोग कूच; जानें 4 सूत्रीय एजेंडा
नई दिल्ली में INDIA ब्लॉक के शीर्ष नेताओं की तीन घंटे से अधिक चली उच्चस्तरीय बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, सोनिया गांधी और अन्य घटक दलों के नेताओं ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में देशव्यापी ‘लोकतंत्र बचाओ मार्च’ (Save Democracy March) का औपचारिक ऐलान किया।
गांधी जयंती (2 अक्टूबर) से शुरू होकर 8 अक्टूबर तक देश के प्रत्येक जिले में जिलाधिकारियों के बाहर शांतिपूर्ण मार्च और धरने आयोजित किए जाएंगे।
लोकसभा और राज्यसभा के सभी विपक्षी सांसद एकजुट होकर नई दिल्ली स्थित भारत निर्वाचन आयोग मुख्यालय तक पैदल मार्च करेंगे और ज्ञापन सौंपेंगे।
विपक्षी दलों का शीर्ष प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से समय मांगकर मुलाकात करेगा और चुनावी प्रक्रियाओं में संवैधानिक रुकावटों व संस्थाओं के कथित दुरुपयोग पर आधिकारिक प्रतिवेदन सौंपेगा।
गठबंधन 1 नवंबर को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक विशाल रैली आयोजित करेगा, जिसके स्थान और रूपरेखा की घोषणा जल्द की जाएगी। इसके अतिरिक्त पूरे देश में 5 बड़ी रैलियां भी प्रस्तावित हैं।
केंद्र सरकार ने दी ‘ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-3’ को मंजूरी
केंद्र सरकार ने ₹1.86 लाख करोड़ की ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर के तीसरे चरण की योजना को मंजूरी दे दी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश भर में इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम को सुदृढ़ करना है जिससे रिन्यूएबल एनर्जी को सीधे ग्रिड से जोड़कर पीक आवर्स में पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराना है।
जिसके लिए राज्यों में कुल 1.35 लाख मेगावाट क्षमता की नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं का ग्रिड एकीकरण और ट्रांसमिशन का लक्ष्य रखा गया है। पीक आवर्स में पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने और ग्रिड को स्थिर रखने के लिए 50 गीगावाट घंटे क्षमता का बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली स्थापित करने की बात कही गई है। इस फेज-3 को वर्ष 2032-33 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
इससे आम नागरिक का क्या फायदा होगा?
भारत रिन्यूएबल एनर्जी स्थापित क्षमता के मामले में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश है। जुलाई 2026 तक देश की स्थापित सौर क्षमता 164.59 गीगावाट तक पहुंच गई, जो 2014 में केवल 2.8 गीगावाट थी। अगर रिन्यूएबल एनर्जी को सीधे ग्रिड से जोड़ दिया जाता है तो पीक आवर्स के दौरान होने वाली बिजली कटौती को कम किया जा सकता है यानि पीक आवर्स माने दिन का वह समय जब किसी सेवा, यातायात या बिजली की मांग सबसे ज्यादा होती है। इसके अलावा जिससे इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन चार्ज कम होने से राज्यों में बिजली सस्ती होगी। 2035 तक 900 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आएगी। पावर, मैन्युफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे।
घरेलू LPG के लिए अनिवार्य बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त: केंद्र से मांगा जवाब, जानें पूरा मामला
दिल्ली उच्च न्यायालय ने 1 अक्टूबर से घरेलू LPG उपभोक्ताओं के लिए रियायती दर और सब्सिडी पर गैस रिफिल बुक कराने हेतु बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण अनिवार्य करने के केंद्र सरकार के फैसले पर केंद्र सरकार से जवाब माँगा है। साथ ही कोर्ट ने कहा – इस देश में हर किसी के पास आधार नहीं है, लेकिन वे भी एलपीजी का उपभोग कर रहे हैं।
विवाद की वजह क्या है?
केंद्र सरकार ने नियम बनाया था कि 1 अक्टूबर से घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं को नियंत्रित खुदरा मूल्य और लागू सब्सिडी का लाभ पाने के लिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण कराना अनिवार्य होगा। जिन उपभोक्ताओं का ई-केवाईसी अधूरा है, उन्हें सिलेंडर तो मिलेगा लेकिन उन्हें बिना सब्सिडी वाली बाजार कीमत चुकानी होगी।
याचिकाकर्ता की दलील क्या थी?
याचिका में दलील दी गई है कि 1 अक्टूबर से बायोमेट्रिक न होने पर सब्सिडी वाले सिलेंडर रोकने का यह फैसला सुप्रीम कोर्ट द्वारा के.एस. पुट्टास्वामी बनाम भारत संघ मामले में दिए गए ‘निजता के अधिकार’ का उल्लंघन करता है। देश में आज भी बड़ी संख्या में बुजुर्ग, प्रवासी श्रमिक, ग्रामीण आबादी और हाशिए पर खड़े लोग हैं जिनके पास बायोमेट्रिक पहचान पत्र नहीं है या उनके फिंगरप्रिंट/आइरिस मैच नहीं होते। रसोई गैस एक आवश्यक बुनियादी नागरिक सेवा है। इस तरह की अनिवार्यता से लाखों वैध और गरीब उपभोक्ता अपनी गैस सब्सिडी और समय पर सिलेंडर रिफिल से वंचित हो सकते हैं।
