साल 1237. हज़ारों मंगोल घुड़सवार तलवारें खींचकर रियाज़ान शहर के बाहर खड़े थे. रूसी राजकुमारों के बातचीत के ऑफ़र को ठुकराते हुए, मंगोल कमांडर ने एक ही मांग की: “मुझे अपनी दौलत का दसवां हिस्सा दो—अपने घोड़े, अपने आदमी… सब कुछ.” सिर्फ़ पाँच दिन बाद, शहर की एक भी दीवार खड़ी नहीं रही. हर एक नागरिक का कत्ल कर दिया गया.
यह हमारी सीरीज़ “रूस के 1000 साल” का दूसरा एपिसोड है. इस वीडियो में, हम इतिहास के सबसे बड़े रहस्यों में से एक को सुलझाएंगे. इतिहासकारों ने इस 240 साल के समय को “मंगोल योक” कहा है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि मंगोलों ने कभी सीधे रूस पर राज नहीं किया! कोई मंगोल गवर्नर नहीं बैठा, न ही रूसी शहरों पर मंगोल झंडे फहराए गए.
तो, अगर मंगोल शहरों में मौजूद ही नहीं थे… तो रूस गुलाम कैसे बना? चंगेज खान के पोते, बटू खान ने ताकतवर कीवन रस को कैसे कुचला? रूसी राजकुमारों की एक ऐतिहासिक गलती कैसे तबाही का कारण बनी? और इस भयानक बदलाव के बीच “मॉस्को” नाम का एक छोटा सा शहर कैसे उभरा, और इवान कलिता ने अपनी चालाकी से इतिहास कैसे बदल दिया?
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