30 September News Explainer:देश में सांस्कृतिक विरासत, बुनियादी ढांचे के विकास, शहरी स्वच्छता और आंतरिक व बाहरी सुरक्षा से जुड़े कई अहम फैसले सामने आए हैं। आज के इस लेख में यूनेस्को की अस्थायी सूची में भारत की 5 नई धरोहरों के शामिल होने के ऐतिहासिक महत्व, दिल्ली में ₹1,900 करोड़ की सड़क बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और स्वच्छ भारत मिशन के तहत शुरू की गई ‘प्रगति-50’ पहल की पड़ताल कर रहे हैं। इसके साथ ही महाराष्ट्र की सिंगल मदर्स सपोर्ट पॉलिसी, भारत-कजाकिस्तान ‘काजिंद’ अभ्यास और कठुआ घटनाक्रम से जुड़े तमाम प्रशासनिक व रणनीतिक पहलुओं का निष्पक्ष और बिंदुवार विश्लेषण नीचे विस्तार से पढ़ें।
कठुआ में CISF कैंप में गोलीबारी: असिस्टेंट कमांडेंट समेत 4 जवानों की मौत, आरोपी हेड कॉन्स्टेबल AK-47 के साथ गिरफ्तार
जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में CISF के एक हेड कॉन्स्टेबल अपनी सरकारी सर्विस राइफल से साथी जवानों पर गोलियां चला दीं। इस घटना में एक असिस्टेंट कमांडेंट सहित 4 सीआईएसएफ कर्मियों की मौत हो गई। घटना का कारण दो जवानों के बीच बहस बताया जा रहा है।
शहीद जवानों का विवरण:
- अंकित कुमार पांडे – असिस्टेंट कमांडेंट (Assistant Commandant)
- लक्ष्मण सिंह – सब-इंस्पेक्टर (SI)
- रफीक अहमद – कॉन्स्टेबल (Constable)
- संदीप कुमार – कॉन्स्टेबल (Constable)
कहा हुई है ये घटना
यह घटना बसोहली तहसील में रावी नदी पर बने ‘सेवा-3 पनबिजली परियोजना’ के परिसर में हुई। यह प्रोजेक्ट 1993 में शुरू हुआ था, लेकिन 2013 में आई भीषण बाढ़ में इसका 300 मीटर हिस्सा बह जाने के कारण यह पिछले 12 वर्षों से पूरी तरह बंद पड़ा है। सीआईएसएफ इसकी परिसंपत्तियों की सुरक्षा में तैनात थी।
दिल्ली को ट्रैफिक जाम से मुक्ति के लिए अमित शाह ने शुरू कीं ₹1,900 करोड़ की 4 सड़क परियोजनाएं, बारापुल्ला फेज-3 शुरू
गृह मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में ₹1,900 करोड़ रुपये से अधिक की 4 बड़ी सड़क बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की शुरुआत की। यह पूर्वी और दक्षिणी दिल्ली के बीच सिग्नल-फ्री कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। जिससे जो दूरी तय करने में पहले 45 से 60 मिनट लगते थे, वह सफर अब मात्र 10 से 15 मिनट में पूरा हो सकेगा। इसके शुरू होने से आश्रम चौक, डीएनडी फ्लाईवे और रिंग रोड पर वाहनों का भारी दबाव काफी हद तक कम हो जाएगा। इनमें लंबे समय से अटकी बारापुल्ला फेज-3 एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना भी शामिल है। इसके अलावा, मोदी मिल-सावित्री सिनेमा फ्लाईओवर और लोनी अंडरपास की आधारशिला भी रखी गई।
बारापुल्ला फेज-3 एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना क्या है?
बारापुल्ला फेज-3 एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना दिल्ली में पूर्वी और दक्षिणी दिल्ली के बीच यातायात को सुगम और सिग्नल-फ्री बनाने वाली एक महत्वपूर्ण सड़क बुनियादी ढांचा परियोजना है। यह कॉरिडोर मयूर विहार फेज-1 से सराय काले खां होते हुए एम्स तक की कनेक्टिविटी को जोड़ता है। फेज-3 की लंबाई लगभग 3.5 किलोमीटर है, जिससे कुल मिलाकर करीब 9 से 10 किमी का सिग्नल-फ्री कॉरिडोर तैयार होता है। इस 6-लेन कॉरिडोर में वाहनों के अलावा पहली बार साइकिल चालकों और पैदल यात्रियों के लिए अलग से ट्रैक व फुटपाथ भी बनाए गए हैं।
कैंसर दवाओं की मनमानी कीमतों पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा ₹2,700 की दवा ₹27 हजार में बेचना नरसंहार, जानें पूरा विवाद
सुप्रीम कोर्ट ने कैंसर दवाओं के 10 गुना अधिक दामों पर केंद्र सरकार और निजी अस्पतालों को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि ₹2,700 की लागत पर ₹27,000 एमआरपी छापना दिनदहाड़े डकैती और नरसंहार के बराबर है। DPCO, 2013 के तहत NPPA दवाओं की अधिकतम सीमा तय करती है। साथ ही कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब आयुष्मान भारत जैसी सरकारी योजनाओं में मरीज इलाज कराते हैं, तो इस 10 गुना बढ़ी हुई कीमत का भुगतान सरकारी खजाने यानी आम जनता के टैक्स के पैसे से होता है।
भारत में दवाओं की कीमतें कैसे तय होती हैं?
ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर (DPCO, 2013) के तहत नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) आवश्यक दवाओं की अधिकतम सीमा तय करती है।
स्वास्थ्य मंत्रालय ‘नेशनल लिस्ट ऑफ एसेंशियल मेडिसिन्स’ (NLEM) तैयार करता है, जिसमें आम व गंभीर बीमारियों की आवश्यक दवाएं शामिल की जाती हैं।
बाजार में उपलब्ध ब्रांड्स के औसत मूल्य के आधार पर अधिकतम मूल्य तय होता है, जिससे अधिक पर बेचना गैरकानूनी है।
जो दवाएं NLEM सूची में शामिल नहीं होती हैं उन पर सरकार का सीधा नियंत्रण नहीं होता। कंपनियां उन पर सालाना 10% तक कीमत बढ़ाने के लिए स्वतंत्र होती हैं, जिसका फायदा उठाकर जीवनरक्षक कैंसर दवाओं पर 800% से 1000% तक ट्रेड मार्जिन जोड़ा जाता है।
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने लॉन्च की ‘प्रगति-50’ पहल, 24 राज्यों के 50 शहर बनेंगे कचरा-मुक्त मॉडल सिटी
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के तहत ‘प्रगति-50’ पहल लॉन्च की है। इस योजना का प्राथमिक लक्ष्य 24 राज्यों के 50 चुनिंदा शहरों को शहरी स्वच्छता, अपशिष्ट प्रबंधन और चक्रीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में राष्ट्रीय ‘मॉडल सिटी’ के रूप में विकसित करना है। इन 50 शहरों में देश के शीर्ष आर्थिक केंद्र, सांस्कृतिक व धार्मिक महत्व के स्थल तथा प्रमुख पर्यटन केंद्र शामिल हैं। इसमे ठोस कचरा प्रबंधन, स्रोत पर ही कचरा अलग करने और यूज्ड वॉटर मैनेजमेंट पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
प्रगति-50 में क्या होगा खास?
- दुर्गापुर स्थित सीएसआईआर-सीएमईआरआई के सहयोग से ‘स्वच्छ भारत टेस्ट बेड एंड इनोवेशन सेंटर’ की शुरुआत की गई।
- यह सेंटर स्वच्छता प्रौद्योगिकियों के अनुसंधान, परीक्षण, सत्यापन और उत्पाद विकास पर काम करेगा।
- इसके अलावा आईआईटी कानपुर के सहयोग से 13 नए स्टार्ट-अप्स को इस मिशन से जोड़ा गया है।
- नागरिकों द्वारा स्वच्छता से जुड़ी शिकायतों के त्वरित निवारण के लिए एक समर्पित व्हाट्सएप चैनल शुरू किया गया है।
- इसके साथ ही, जन-जागरूकता और व्यवहार परिवर्तन के लिए ‘स्वच्छता व्यवहार परिवर्तन डिजिटल कोष’ का भी शुभारंभ किया गया।
क्या होता है चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy)?
सर्कुलर इकोनॉमी (चक्रीय अर्थव्यवस्था) उत्पादन और उपभोग का एक ऐसा आर्थिक मॉडल है, जिसमें संसाधनों को एक बार इस्तेमाल करके फेंकने के बजाय उपयोग करने के चक्र में बनाए रखा जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य कचरा शून्य करना, प्रदूषण घटाना और प्राकृतिक संसाधनों का अधिकतम पुनर्चक्रण करना है।
सर्कुलर इकोनॉमी मुख्य रूप से इन 5 ‘R’ सिद्धांतों पर टिकी होती है:
- Refuse (इनकार): अनावश्यक पैकेजिंग और सिंगल-यूज प्लास्टिक के उपयोग से बचना।
- Reduce (कम करना): उत्पादन प्रक्रिया में कम से कम ऊर्जा और कच्चे माल का उपयोग।
- Reuse (पुनः उपयोग): एक ही वस्तु का बार-बार इस्तेमाल करना।
- Repair/Refurbish (मरम्मत): इलेक्ट्रॉनिक और मशीनी सामान को फेंकने के बजाय सुधारकर चलाना।
- Recycle (पुनर्चक्रण): प्लास्टिक, कांच, कागज और ई-कचरे को दोबारा कच्चे माल में बदलना।
महाराष्ट्र में सिंगल मदर्स के बच्चों के लिए ऐतिहासिक पहल: एडमिशन फॉर्म में जुड़ेगा अलग कॉलम, जानें ‘SMCSS 2026’ की खूबियां
महाराष्ट्र में राज्य के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के एडमिशन फॉर्म में अब सिंगल मदर्स के बच्चों के लिए एक अलग कॉलम जोड़ा जाएगा। सिंगल मदर्स चिल्ड्रेन सपोर्ट स्कीम 2026 के तहत ऐसे छात्रों को हॉस्टल, इमोशनल काउंसलिंग और करियर गाइडेंस दी जाएगी।
SMCSS 2026 पॉलिसी क्या है?
सिंगल मदर्स चिल्ड्रेन सपोर्ट स्कीम महाराष्ट्र सरकार द्वारा उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे सिंगल मदर के बच्चों के लिए उच्च शिक्षा को सुलभ और सुरक्षित बनाने हेतु एक विशेष सहायता प्रणाली है। इससे उन्हें वित्तीय मदद के साथ-साथ हॉस्टल, स्किल ट्रेनिंग और मेंटल काउंसलिंग मुहैया कराई जाएगी।
SMCSS से छात्रों को मिलने वाली प्रमुख सुविधाएं
- अब तक कई कॉलेज अनौपचारिक मदद करते थे, लेकिन अब एक समान राज्यव्यापी प्रणाली के जरिए ऐसे छात्रों की आधिकारिक मैपिंग होगी।
- दूरदराज या आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आने वाले छात्रों को प्राथमिकता के आधार पर हॉस्टल में आवास मिलेगा।
- पारिवारिक परिस्थितियों और अकेलेपन से जूझ रहे छात्रों के लिए कॉलेजों में पेशेवर मेंटल हेल्थ और वेलनेस काउंसलिंग उपलब्ध कराई जाएगी।
- छात्रों को इंडस्ट्री-रेडी बनाने के लिए विशेष स्किल-डेवलपमेंट प्रोग्राम और प्लेसमेंट में सहयोग मिलेगा।
यूनेस्को की अस्थायी सूची में भारत के 5 नए स्थल और प्रस्ताव शामिल, कुल संख्या बढ़कर हुई 78
यूनेस्को की अस्थायी सूची में भारत के पांच नए स्थल और श्रृंखला तथा अंतरराष्ट्रीय प्रस्ताव शामिल किए गए हैं। इनमें बाघ गुफाओं के बौद्ध भित्ति चित्र, चंबल घाटी के मंदिर समूह, गुप्तकालीन उदयगिरि गुफाएं, गिन्नोरगढ़ की जनजातीय विरासत और भारत-दक्षिण अफ्रीका का साझा ‘सत्याग्रह स्थल’ शामिल हैं। इसके साथ ही यूनेस्को की इस सूची में भारत की कुल धरोहरों की संख्या बढ़कर 78 हो गई है।
यूनेस्को की अस्थायी सूची क्या होती है?
यूनेस्को की अस्थायी सूची उन सांस्कृतिक, प्राकृतिक और मिश्रित धरोहर स्थलों की एक आधिकारिक राष्ट्रीय सूची है, जिन्हें कोई देश आने वाले वर्षों में अंतिम विश्व धरोहर स्थल घोषित कराने के लिए नामांकित कराना चाहता है।
इससे स्थल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलती है, जिससे वैश्विक पुरातात्विक संस्थाओं, शोधकर्ताओं और पर्यटकों का ध्यान उस स्थान की ओर आकर्षित होता है। इसके अलावा सूची में शामिल होते ही केंद्र और राज्य सरकारें उस स्थल के संरक्षण, अतिक्रमण हटाने और आधारभूत ढांचे को सुधारने के लिए विशेष बजट आवंटित करती हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और राज्य पुरातत्व विभाग वहां के कानूनी संरक्षण ढांचे को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप अपग्रेड करते हैं।
अस्थायी सूची से विश्व धरोहर स्थल में कैसा होता है नामांकन
Step 1.अस्थायी सूची में पंजीकरण
संबंधित देश का सांस्कृतिक मंत्रालय उस स्थल के ऐतिहासिक व सांस्कृतिक साक्ष्य जुटाकर यूनेस्को के पेरिस स्थित केंद्र को भेजता है, जहां इसे अस्थायी सूची में दर्ज किया जाता है।
Step 2.विस्तृत नामांकन डोजियर तैयार करना
स्थल को अस्थायी सूची में कम से कम 1 वर्ष पूरा होने के बाद सरकार सैकड़ों पन्नों का एक व्यापक तकनीकी डोजियर तैयार करती है, जिसमें स्थल की सीमा, संरक्षण योजना और ऐतिहासिक महत्व दर्ज होता है।
Step 3.स्वतंत्र वैश्विक एजेंसियों द्वारा ग्राउंड जांच
यूनेस्को की स्वतंत्र विशेषज्ञ संस्थाएं, सांस्कृतिक स्थलों के लिए ICOMOS और प्राकृतिक स्थलों के लिए IUCN उस स्थल का जमीनी दौरा कर निरीक्षण और वैज्ञानिक मूल्यांकन करती हैं।
Step 4.विश्व धरोहर समिति का अंतिम फैसला
21 सदस्य देशों की यूनेस्को ‘विश्व धरोहर समिति’ की वार्षिक बैठक में मतदान और आम सहमति से तय होता है कि स्थल को अंतिम ‘विश्व धरोहर स्थल’ (World Heritage Site) का दर्जा दिया जाए, खारिज किया जाए या सुधार के लिए लौटाया जाए।
भारत-कजाकिस्तान संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘काजिंद-2026’: ओस्केमेन में हुआ भव्य शुभारंभ, जानें दोनों देशों के लिए क्यों है अहम
भारत और कजाकिस्तान के बीच वार्षिक द्विपक्षीय संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘काजिंद-2026’ का उद्घाटन समारोह कजाकिस्तान के ओस्केमेन में आयोजित किया गया। यह अभ्यास वर्ष 2016 में ‘प्रबल दोस्तिक’ के नाम से शुरू हुआ था। यह अभ्यास हर साल दोनों देशों में बारी-बारी से आयोजित किया जाता है। इसके दूसरे संस्करण के बाद 2018 में इसका दायरा बढ़ाकर इसे ‘काजिंद’ नाम दिया गया।
जानें दोनों देशों के लिए क्यों है अहम
कजाकिस्तान मध्य एशिया में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक और रणनीतिक साझेदार है। यूरेनियम आपूर्ति के साथ-साथ यूरेशियन सुरक्षा और ऊर्जा मार्गों (जैसे INSTC) के लिहाज से कजाकिस्तान के साथ मजबूत सैन्य साझेदारी भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- आतंकवाद विरोधी अभियान: संयुक्त राष्ट्र के अध्याय VII के तहत अर्ध-शहरी और पहाड़ी इलाकों में आतंकवादियों के खात्मे के लिए संयुक्त रणनीति बनाना।
- इंटर-ऑपरेबिलिटी: दोनों देशों के सैनिकों के बीच हथियार प्रणालियों, संचार तकनीकों और रणनीति की साझा समझ को बढ़ावा देना।
- ड्रोन और आधुनिक युद्धक तकनीक: आधुनिक युद्धक्षेत्र में ड्रोन रोधी तकनीक, क्लोज क्वार्टर बैटल और बंधक बचाव अभियानों का वास्तविक अभ्यास करना।
अमेरिकी में दुर्लभ बीमारियों की दवाओं पर नहीं लगेगा शुल्क, 20 देशों की सूची में भारत शामिल
अमेरिका ने भारत सहित 20 देशों से आयात होने वाली दुर्लभ बीमारियों की दवाओं, जीन व सेल थेरेपी और बांझपन के इलाज में प्रयुक्त दवाओं पर 0% शुल्क रखने की घोषणा की है। इससे पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने पेटेंट प्राप्त दवाओं और उनसे जुड़े घटकों पर 100% आयात शुल्क लगाने फैसला किया था।
Zero Tariff के दायरे में शामिल उत्पाद:
- दुर्लभ बीमारियों (Rare Diseases) की दवाएं: ऑर्फन ड्रग्स और विशिष्ट अनुवांशिक विकारों के उपचार।
- इनफर्टिलिटी उपचार: बांझपन निवारण में प्रयुक्त विशेष हार्मोनल और थेराप्यूटिक दवाएं।
- एडवांस्ड थेरेपी: सेल थेरेपी (Cell Therapy) और जीन थेरेपी (Gene Therapy)।
- बायोलॉजिक्स: एंटीबॉडी-ड्रग कॉन्जुगेट्स (Antibody-Drug Conjugates)।
- पशु चिकित्सा: विशेष वेटरनरी (Veterinary) उत्पाद व उनके सक्रिय घटक।
भारतीय फार्मा उद्योग के लिए क्या हैं मायने?
अमेरिका भारतीय जेनेरिक और बायोलॉजिक दवाओं का सबसे बड़ा खरीदार है। 100% टैरिफ से छूट मिलने से भारतीय फार्मा कंपनियों (जैसे बायोकॉन, डॉ. रेड्डीज, सन फार्मा आदि) के मार्जिन सुरक्षित रहेंगे। वही अमेरिका में दुर्लभ बीमारियों के इलाज की लागत पहले ही अधिक है; भारतीय दवाओं पर शून्य शुल्क रहने से अमेरिकी स्वास्थ्य प्रणाली में महंगाई का दबाव नियंत्रित रहेगा।
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