29 September News Explainer: डिजिटल प्रत्यर्पण पोर्टल लॉन्च, MDR पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश

29 September News Explainer: देश में प्रशासनिक सुधारों और न्यायिक व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आए हैं।  केंद्र सरकार द्वारा भगोड़े अपराधियों की वापसी को सुगम बनाने के लिए शुरू किए गए नए ‘डिजिटल प्रत्यर्पण पोर्टल’और मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा इसके इसके साथ ही भारतीय […]

29 September News Explainer: देश में प्रशासनिक सुधारों और न्यायिक व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आए हैं।  केंद्र सरकार द्वारा भगोड़े अपराधियों की वापसी को सुगम बनाने के लिए शुरू किए गए नए ‘डिजिटल प्रत्यर्पण पोर्टल’और मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा इसके इसके साथ ही भारतीय अर्थव्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा और नीतिगत बदलावों से जुड़े अन्य 5 सबसे अहम मुद्दों की तथ्यात्मक बैकस्टोरी, क़ानूनी संदर्भ और उनके संभावित प्रभावों का निष्पक्ष व बिंदुवार विश्लेषण नीचे विस्तार से पढ़ें।

आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति ‘प्रहार’: अमित शाह ने लॉन्च किया नया प्रत्यर्पण पोर्टल, जानें 10 साल का सुरक्षा रोडमैप

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में ‘प्रहार आतंकवाद-रोधी नीति और रणनीति’ सम्मेलन का उद्घाटन किया और विदेशों से अपराधियों की वापसी में तेजी लाने के लिए एक अत्याधुनिक डिजिटल प्रत्यर्पण पोर्टल लॉन्च किया। यह पोर्टल विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय, इंटरपोल और राज्य पुलिस बलों के बीच रियल-टाइम डेटा शेयरिंग और प्रत्यर्पण अनुरोधों की ट्रैकिंग को पूरी तरह डिजिटल व समयबद्ध बनाएगा।

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केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के मजबूत समन्वय के चलते 2019 से 2026 के दौरान 36 देशों से 288 भगौड़े अपराधियों को प्रत्यर्पित/डिपोर्ट कर भारत की अदालतों के सामने पेश किया गया।

प्रहार नीति क्या है?

भारत की पहली एकीकृत आतंकरोधी नीति ‘प्रहार’ को अगले 10 वर्षों के लिए संस्थागत रूप देने पर जोर दिया गया। सम्मेलन में इस नीति को जमीनी स्तर पर थाना स्तर तक पहुंचाने और स्वचालित रिस्पॉन्स प्रणाली विकसित करने पर सहमति बनी। इसके 7 प्रमुख स्तंभ हैं:

  1. रोकथाम (Prevention)
  2. त्वरित प्रतिक्रिया (Response)
  3. आंतरिक क्षमताओं को एकजुट करना (Mobilizing Internal Capabilities)
  4. मानवाधिकारों का सम्मान (Human Rights)
  5. आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली परिस्थितियों को कम करना (Mitigating Enabling Conditions)
  6. अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में तालमेल (International Cooperation)
  7. समाज के एकजुट प्रयास (Whole-of-Society Approach)

सर्वोच्‍च न्यायालय ने मर्चेंट डिस्काउंट रेट के फैसले पर रोक लगाने से इनकार किया

सर्वोच्च न्यायालय ने ₹2,000 से अधिक के UPI लेन-देन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने के केंद्र सरकार के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है। अदालत ने केंद्र सरकार, RBI और अन्य संबंधित पक्षों को औपचारिक नोटिस जारी कर 4 सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।

MDR क्या होता है?

मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह शुल्क है जो कोई व्यापारी अपने ग्राहकों से डिजिटल माध्यम (जैसे डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या यूपीआई) से भुगतान स्वीकार करने के बदले बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को देता है। आसान भाषा में यह शुल्क ग्राहक से नहीं, बल्कि व्यापारी की जेब से कटने वाला प्रोसेसिंग शुल्क है।

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पूरा मामला क्या है?

जनवरी 2020 में भारत सरकार ने डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए RuPay डेबिट कार्ड और UPI पर Zero MDR नीति लागू की थी अर्थात व्यापारी से UPI लेनदेन पर एक भी पैसा चार्ज नहीं काटा जाएगा। इसका पूरा खर्च सरकार सब्सिडी देकर खुद वहन कर रही थी।

लगातार बढ़ते UPI इन्फ्रास्ट्रक्चर के रखरखाव लागत और बैंकों व फिनटेक कंपनियों की वित्तीय स्थिरता का हवाला देते हुए सरकार ने 15 अक्टूबर से ₹2,000 से अधिक के पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) UPI ट्रांजेक्शन पर 0.4% MDR लगाने का प्रस्ताव रखा। जिसके बाद विभिन्न व्यापारिक संगठनों ने इस 0.4% शुल्क के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज किया।

सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला

इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर रोक लगाने की मांग की गई। जिसके बाद चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने फैसले पर स्टे लगाने से इनकार कर दिया और टिप्पणी की कि यह मामला “कानूनी से अधिक तकनीकी और नीतिगत” है। केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को आश्वस्त किया कि 96% आम उपभोक्ता और छोटे लेन-देन इस शुल्क से मुक्त रहेंगे।

आम जनता और व्यापारी पर इसका क्या असर होगा?

पक्षस्थितिप्रभाव
आम ग्राहक (User)कोई सीधा शुल्क नहींग्राहकों से यूपीआई के लिए कोई अतिरिक्त पैसा नहीं कटेगा। P2P ट्रांसफर पूरी तरह फ्री रहेगा।
छोटे दुकानदार (सब्जी, चाय, राशन)कोई शुल्क नहीं₹2,000 से कम के बिल होने के कारण 96% लेन-देन पर Zero MDR बना रहेगा।
बड़े रिटेलर्स (गैजेट्स, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स)0.4% MDR लागू₹2,000 से ऊपर के भुगतान पर दुकानदार को हर ₹10,000 पर ₹40 बैंक को देने होंगे, जिससे वे ग्राहकों से कैश मांगने या कार्ड स्वाइप का रुख कर सकते हैं।

UPI पर लगने वाला 0.4% MDR शुल्क बैंक, NPCI और पेमेंट ऐप्स (जैसे PhonePe, Google Pay) के बीच किस अनुपात में बंटता है?

जब ₹2,000 से अधिक का P2M ट्रांजेक्शन होता है (जैसे ₹10,000 का बिल), तो 0.4% के हिसाब से कुल ₹40 का MDR कटता है। इसका अनुमानित वितरण इस प्रकार होता है:

हितधारक (Participant)भूमिकाहिस्सेदारी (%)₹10,000 के लेन-देन पर मिलने वाला हिस्सा
1. इश्यूअर बैंक (Issuer Bank)ग्राहक का बैंक (जैसे SBI, HDFC) जहां से पैसा कटता है और सर्वर लोड झेलता है।40% – 50%₹16 – ₹20
2. एक्वायरर बैंक व गेटवे (Acquirer Bank/PG)दुकानदार का बैंक/मर्चेंट पार्टनर जो खाता क्रेडिट करता है।25% – 30%₹10 – ₹12
3. पेमेंट ऐप्स / TPAPPhonePe, Google Pay, Paytm जो ऐप इंटरफेस और साउंडबॉक्स सेवाएं देते हैं।15% – 20%₹6 – ₹8
4. NPCI (नेटवर्क स्विच)UPI का केंद्रीय स्विच और क्लियरिंग हाउस (Switching Fee)।5% – 10%₹2 – 4₹

भारत-UAE आर्थिक साझेदारी: स्थानीय मुद्रा में व्यापार, CBDC एकीकरण और $200 अरब का लक्ष्य

भारत और यूएई ने अपने द्विपक्षीय व्यापार के त्वरित निपटान, भुगतान व वित्तीय संदेश प्रणालियों के एकीकरण और केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्राओं (CBDC) के समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए स्थानीय मुद्राओं (रुपया और दिरहम) में व्यापार पर सहमति जताई है। इस पहल से दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को अधिक सुगम, सुलभ और मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।

साथ ही दोनों देश 2032 तक अपने व्यापार को दोगुना कर 200 अरब डॉलर तक ले जाने के साझा रोडमैप पर काम कर रहे हैं। जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार $101.25 अरब था, जिसमे गैर-तेल व्यापार 76 .2 अरब डॉलर रहा। यूएई अब तक भारत में लगभग $25 अरब का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) कर चुका है।

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इसके अलावा मुंबई में आयोजित ‘भारत-यूएई निवेश संबंधी उच्च स्तरीय संयुक्त कार्य बल’ की 14वीं बैठक में दोनों देशों ने ओडिशा में प्रस्तावित 11.5 अरब डॉलर के एकीकृत एल्युमीनियम परिसर और गुजरात में फूड पार्क परियोजना सहित कई निवेश परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। भारत और यूएई के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए इस संयुक्त कार्यबल की स्थापना वर्ष 2013 में की गई थी।

अंतरिक्ष में डेटा सेंटर: भारतीय स्टार्टअप टेकमी2स्पेस का ‘MOI-1A’ 1 अक्टूबर को होगा लॉन्च, जानें कैसे बदलेगी सैटेलाइट तकनीक

भारतीय स्पेस-टेक स्टार्टअप टेकमी2स्पेस (Takme2Space) 1 अक्टूबर को स्पेसएक्स के रॉकेट से देश का पहला ऑर्बिटल कंप्यूटिंग सैटेलाइट ‘MOI-1A’ लॉन्च करेगा। 14 किग्रा का यह सैटेलाइट अंतरिक्ष में ही AI से डेटा प्रोसेस करेगा, जिससे धरती पर भारी रॉ-डेटा डाउनलोड करने का खर्च बचेगा। यह सैटेलाइट अमेरिकी एरोस्पेस कंपनी SpaceX के ट्रांसपोर्टर-18 राइडशेयर मिशन के जरिए अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित किया जाएगा।

ऑर्बिटल कंप्यूटिंग (स्पेस डेटा सेंटर) की जरूरत क्यों?

अब तक अर्थ-ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट्स अंतरिक्ष से विशाल मात्रा में Raw Unprocessed Data धरती के ग्राउंड स्टेशनों को भेजते हैं, जिसे डाउनलोड करने में भारी बैंडविड्थ, समय और लाखों डॉलर का खर्च आता है। यह सैटेलाइट सीधे कक्षा में ही एआई मॉडल्स रन करेगा। सैटेलाइट किसी क्षेत्र (जैसे खेत, खदान या सीमा) के ऊपर से गुजरते ही इमेज को खुद प्रोसेस करेगा और केवल जरूरी इन्साइट धरती पर भेजेगा। इससे बैंडविड्थ और डेटा डाउनलोडिंग लागत में भारी बचत होगी।

MOI-1A सैटेलाइट की तकनीकी विशेषताएं

  1. कंप्यूटिंग क्षमता: इसमें Nvidia Jetson Orin NX प्रोसेसर लगा है, जो 117 TOPS (ट्रिलियन ऑपरेशन्स प्रति सेकंड) की ताकतवर एआई कंप्यूटिंग क्षमता देता है।
  2. आकार और वजन: यह एक 14 किलोग्राम वजनी 6U क्यूबसैट (226.3 x 100 x 366 मिमी) है।
  3. स्टोरेज और इमेजिंग: इसमें 2 टेराबाइट (TB) का ऑनबोर्ड हाई-स्पीड स्टोरेज और 9-बैंड मल्टीस्पेक्ट्रल इमेजिंग कैमरा सिस्टम मौजूद है।
  4. पावर कैपेसिटी: 120 वॉट की पीक पावर क्षमता।
  5. मेक इन इंडिया: सब-सिस्टम्स की डिजाइनिंग और निर्माण भारत में हुआ है, जबकि चिप्स और सोलर सेल्स आयात किये गए।

सीएम रेखा गुप्ता ने लॉन्च किया ‘दिल्ली उद्योग मित्र पोर्टल’, जानें व्यापारियों को कैसे होगा फायदा

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने राज्य सरकार के ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत ‘दिल्ली उद्योग मित्र पोर्टल’ लॉन्च किया। यह पोर्टल राजधानी में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को गति देने और उद्योगपतियों, व्यापारियों व स्टार्टअप्स को लालफीताशाही से राहत दिलाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

उद्योग मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि उद्यमियों को कारोबार से जुड़े विभिन्न लाइसेंस, नवीनीकरण और अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त करने के लिए अलग-अलग दफ्तरों में जाने की जरूरत नहीं होगी। एक ही डिजिटल आईडी के माध्यम से व्यवसायी कई विभागों की मंजूरियों के लिए आवेदन और उनकी रियल-टाइम ट्रैकिंग कर सकेंगे।

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