रूस का इतिहास: कैथरीन द ग्रेट वो महिला जिसने पति का तख्तापलट कर रूस पर राज किया (भाग 8)

1762 में 33 साल की एक जर्मन राजकुमारी ने पुरुषों की सैन्य वर्दी पहनकर अपने ही पति का तख्तापलट कर दिया। बिना किसी रूसी खून या कानूनी दावे के, कैथरीन द्वितीय ने 34 सालों तक शासन कर क्रीमिया जीता और रूस को महाशक्ति बनाया। जानिए एक विदेशी अजनबी के "द ग्रेट" बनने की दास्तान।

कैथरीन द ग्रेट रूस का इतिहास (Catherine the Great Russian History): 28 जून 1762 की सुबह, सेंट पीटर्सबर्ग के बाहर पीटरहॉफ़ महल में। एक जर्मन मूल की महिला, जो अभी कुछ ही घंटे पहले तक रूस के ज़ार की पत्नी थी, घोड़े पर सवार, पुरुषों की सैन्य वर्दी पहनी थी, हाथ में नंगी तलवार लिए खड़ी है और इज़्माइलोव्स्की गार्ड्स रेजिमेंट के हज़ारों सैनिक उसके पीछे खड़े थी। वो अपने ही पति, ज़ार पीटर तृतीय, के ख़िलाफ़ तख़्तापलट का ऐलान कर चुकी थी।

ठीक आठ दिन बाद… ज़ार पीटर तृतीय संदिग्ध हालात में एक कमरे में मृत पाया गया। और वही जर्मन मूल की महिला, जिसका असली नाम सोफ़ी थी, रूस के तख्त पर बैठ गई। नाम मिलेगा कैथरीन द्वितीय। लेकिन ना तो वह रूस के जार की उतरधिकारी थी, न ही गद्दी पर उसका कोई कानूनी हक। तो फिर यह विदेशी महिला अगले 34 सालों तक दुनिया के सबसे बड़े साम्राज्य पर कैसे राज कर पाई? और इतिहास ने उसे “द ग्रेट” यानी ‘महान’ का खिताब क्यों दिया?

और इससे भी बाद सवाल यह था कि एक बाहरी व्यक्ति ने ख़ुद को इतनी गहराई से “रूसी” कैसे साबित किया कि रूढ़िवादी चर्च से लेकर खूंखार सेना तक पूरा देश उसे अपना मान बैठा?

रूस का इतिहास कैथरीन द ग्रेट वो जर्मन महिला जिसने पति का तख्तापलट कर रूस पर राज किया (भाग 8)

इस सफर की शुरुआत हुई थी 1729 में। प्रशिया के एक छोटे, ग़रीब जर्मन रियासत में सोफ़ी का जन्म होता है । 1744 में, सिर्फ़ 15 साल की उम्र में, रूस भेज दिया गया। रूसी महारानी एलिज़ाबेथ जो पीटर द ग्रेट की बेटी थी उसे अपने भतीजे और उत्तराधिकारी, ग्रैंड ड्यूक पीटर, से शादी के लिए चुना था। सोफ़ी ने रूसी भाषा सीखने में जान लगा दी, ऑर्थोडॉक्स ईसाई धर्म अपनाया, और अपना नाम बदलकर “येकातेरिना” (कैथरीन) रख लिया।

पर उसकी शादी एक त्रासदी  साबित हुई। उसका पति पीटर मानसिक रूप से बेहद अपरिपक्व, अस्थिर और प्रशिया-प्रेमी था, उसने खुलेआम रूस की जगह प्रशिया के राजा फ्रेडरिक की तारीफ़ें कीं, बड़ा होने के बावजूद वह दिन भर सिपाहियों से खेलता और खुलेआम रूस की संस्कृति का मजाक उड़ाता। यह तक कि कैथरीन को महल के एक कोने में अलग-थलग कर दिया गया। लेकिन कैथरीन ने रोने में वक्त बर्बाद नहीं किया। उसने उस अकेलेपन में समय का इस्तेमाल पढ़ने में किया, वोल्तेयर, मॉन्तेस्क्यू जैसे एनलाइटनमेंट के दार्शनिकों को पढ़ा, और साथ ही रूसी दरबार में अपने संपर्क और समर्थक बनाए।

खिलौनों से खेलता पीटर तृतीय और उपेक्षित पत्नी का बौद्धिक उत्थान

1762 में एलिज़ाबेथ की मृत्यु के बाद, पीटर तृतीय गद्दी पर बैठा, पर सिर्फ़ छह महीनों में उसने लगभग पूरे रूसी दरबार, चर्च, और सेना को अपना दुश्मन बना लिया। जिस रूस ने ‘सेवन ईयर्स वॉर’ में प्रशिया के खिलाफ लड़ते हुए अपने हज़ारों सैनिकों का खून बहाया था। वही पीटर तृतीय ने एक कदम बढ़कर प्रशिया के साथ अपमानजनक समझौता किया और जीती हुई सारी ज़मीनें अपने चहेते राजा फ्रेडरिक को मुफ्त में लौटा दीं।

सैनिकों के ख़ून की उसने एक झटके में बेकार कर दिया, जिससे सेना में बगावत की चिंगारी सुलगने लगी। ऊपर से उसने ऑर्थोडॉक्स चर्च की संपत्ति छीनने की धमकी देकर पादरियों को भी भड़का दिया।

जिसका नतीजा ये हुआ कि गार्ड्स रेजिमेंट, दरबारी, और चर्च, सब कैथरीन के पास आने लगे। उसने अपने प्रेमी ग्रेगरी ओरलोव और रूसी गार्ड्स अफसरों के साथ मिलकर तख्तापलट की बिसात बिछाई।

1762 का सैन्य तख्तापलट और पीटर तृतीय की संदिग्ध हत्या

28 जून 1762, कैथरीन ने सेंट पीटर्सबर्ग में सैनिकों की वफ़ादारी की शपथ ली और ख़ुद को सम्राट घोषित कर दिया। पीटर तृतीय, जो उस वक़्त पीटरहॉफ़ में था, बिना किसी विरोध के आत्मसमर्पण कर गया। उसे रोप्शा के एक महल में नजरबंद कर दिया गया। और आठ दिन बाद… खबर आई कि पीटर तृतीय मर चुका है।

शाही घोषणा हुई कि उसकी मौत “बवासीर के तीव्र दौरे” से हुई। पर लगभग हर इतिहासकार मानता है कि उसकी हत्या की गई, संभवतः ओरलोव भाइयों के हाथों, हालांकि कैथरीन की सीधी संलिप्तता आज भी बहस का विषय है। एक विदेशी महिला, जिसका गद्दी पर कोई सीधा वैध दावा नहीं था, अब एक “मृत, संदिग्ध हालात वाले पति” की जगह रूस की अकेली शासक बन चुकी थी।

रूस का इतिहास कैथरीन द ग्रेट वो जर्मन महिला जिसने पति का तख्तापलट कर रूस पर राज किया (भाग 8)

सत्ता में आते ही कैथरीन ने जो किया, वो असाधारण था, उसने ख़ुद को इतना “रूसी” साबित कर दिया कि उसकी वैधता पर सवाल धीरे-धीरे ख़त्म हो गए। उसने ख़ुद को ज्ञानोदय की दार्शनिक-रानी की तरह पेश किया, वोल्तेयर जैसे विचारकों से पत्राचार किया, कला-संस्कृति को बढ़ावा दिया, शिक्षा और क़ानूनी सुधारों की कोशिश की। रूस में चेचक का टीका सबसे पहले खुद लगवाकर जनता में विज्ञान का भरोसा जगाया, और सेंट पीटर्सबर्ग में विश्व प्रसिद्ध ‘हर्मिटेज म्यूजियम’ की नींव रखी।

कैथरीन द ग्रेट का सैन्य अभियान

समाज सेवा के अलावा सैन्य मोर्चे पर वह पीटर द ग्रेट से भी आगे निकल गई, उसके शासनकाल में रूस का साम्राज्य विशाल हुआ, क्रीमिया को ऑटोमन साम्राज्य से जीता, पोलैंड का बंटवारा करके बड़ा भूभाग हासिल किया, काला सागर तक पहुंच पक्की की।

लेकिन इस सुनहरे साम्राज्य के पीछे एक कड़वी सच्चाई भी थी। यूरोपीय दार्शनिकों की बातें करने वाली कैथरीन ने रूस के गरीब किसानों को रईसों का गुलाम बना दिया। उसके दौर में किसानों की दासता अपने सबसे क्रूर स्तर पर पहुंच गई, किसानों को समान की तरह खरीदा और बेचा जाने लगा। 1773 में इस जुल्म के खिलाफ फूटा रूसी इतिहास का सबसे बड़ा किसान विद्रोह, पुगाचेव विद्रोह।

एक कोसैक विद्रोही येमेलियान पुगाचेव ने खुद को “जीवित बचा पीटर तृतीय” घोषित कर दिया और पूरे वोल्गा क्षेत्र में आग लगा दी। जिसके बाद कैथरीन ने इस बगावत को इतनी बेरहमी से कुचला कि विद्रोहियों के खून से नदियां लाल हो गईं।

1796 में कैथरीन द ग्रेट की मृत्यु हुई। उसने रूस को यूरोप की सबसे दुर्जेय महाशक्ति बना दिया था। लेकिन उसने अपने पीछे एक ऐसा समाज छोड़ा जो अंदर से दो हिस्से में बट चुका था , ऊपर फ्रेंच बोलने वाले रईसों की अथाह दौलत, और नीचे करोड़ों बेबस गुलाम किसानों की बेबसी ने रूस अब एक ऐसा बारूद पर खड़ा कर चुका था।

वही दूसरी तरफयूरोप का सबसे बड़ा सैन्य जीनियस अपनी विशाल सेना लेकर कूच करने वाला था। 1812 का साल आने वाला था… जब आधा यूरोप एक साथ रूस की बर्फीली सीमाओं में दाखिल होने वाला था। जब नेपोलियन की ‘ग्रैंड आर्मी’ ने मॉस्को पर कब्जा करना चाह रहा था तब रूसियों ने खुद अपनी ही ऐतिहासिक राजधानी को आग के हवाले क्यों कर दिया? जानंगे अगले एपिसोड में ।

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