किस्सा 2001 का: जब एक रात डिनर टेबल पर खत्म हो गया पूरा नेपाल का राजघराना

दुनिया के इतिहास में तख्तापलट बहुत हुए हैं, राजाओं की हत्याएं भी हुई हैं। लेकिन आज से करीब दो दशक पहले, 1 जून 2001 को नेपाल के राजमहल में जो हुआ, उसने पूरी दुनिया को सन्न कर दिया था। यह इतिहास की वो काली रात थी, जब काठमांडू के राजमहल में चल रही एक फैमिली डिनर पार्टी, चंद मिनटों में श्मशान में बदल गई। यह न तो किसी विदेशी दुश्मन का हमला था और न ही किसी बाहरी विद्रोह की साजिश। यह किस्सा एक देश का इतिहास बदलने का है। इस एक घटना ने नेपाल से 240 साल पुरानी राजशाही (Nepal Royal Massacre Story) को हमेशा के लिए खत्म करने की नींव रख दी थी।

नेपाल में राजा बीरेंद्र की लोकप्रियता कितनी थी?

नेपाल उस समय दुनिया का एकमात्र ‘हिंदू राष्ट्र’ था और वहां के राजा बीरेंद्र बीर बिक्रम शाह एक बेहद लोकप्रिय शासक थे। राजा बीरेंद्र को नेपाल के इतिहास में सबसे सभ्य और जन-हितैषी शासकों में से एक माना जाता है, जो अपने सादे जीवन और विकास-उन्मुख सोच के लिए जाने जाते थे। नेपाल के एकमात्र हिंदू राजा होने के नाते, उन्हें पारंपरिक रूप से भगवान विष्णु का अवतार माना जाता था। यह उनके राज्याभिषेक के अनुष्ठानों में भी झलकता था, जहाँ उन्हें पृथ्वी और विष्णु के मंदिरों से प्राप्त मिट्टी से अभिषिक्त (तिलक) किया जाता था। उनका पूरा परिवार नेपाल की जनता में काफी लोकप्रिय था। उनके बड़े बेटे, क्राउन प्रिंस दीपेंद्र, गद्दी के वारिस थे और उन्हें भी लोग बहुत पसंद करते थे।

Nepal Family Masscare: King Birendra and Queen Aishwarya with Family
Nepal Royal Massacre Story in Hindi: King Birendra and Queen Aishwarya with Family

दीपेंद्र और देवयानी की ‘अधूरी प्रेम कहानी’ थी झगड़े की जड़

कुछ रिपोर्ट के मुताबिक के मुताबिक, प्रिंस दीपेंद्र देवयानी राणा से बेइंतिहा प्यार करते थे। देवयानी का ताल्लुक नेपाल के राणा वंश और भारत के ग्वालियर के सिंधिया राजघराने से था। देवयानी की माँ उषा राजे सिंधिया, ग्वालियर के महाराजा जीवाजीराव सिंधिया की बेटी थीं।यही रिश्ता झगड़े की जड़ था। दीपेंद्र की मां, महारानी ऐश्वर्या इस शादी के सख्त खिलाफ थीं। इसके दो कारण बताए जाते हैं:

  1. शाही गोत्र और वंश का पेंच।
  2. देवयानी की मां का भारतीय राजघराने से होना।

नफरत इतनी गहरी थी कि राजा और रानी ने राजकुमार दीपेंद्र को अल्टीमेटम दे दिया था— “या तो देवयानी को चुनो, या फिर गद्दी छोड़ दो।”

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क्या हुआ 1 जून 2001 की रात?

1 जून 2001 को नेपाल का शाही परिवार एक फैमिली डिनर पार्टी के लिए इकट्ठा हुआ। यह पार्टी आम तौर पर महीने में दो बार शुक्रवार को होती थी। डिनर में राजा बीरेंद्र और रानी ऐश्वर्या, और उनके तीन बच्चे (क्राउन प्रिंस दीपेंद्र, राजकुमारी श्रुति, और प्रिंस निरजन) मौजूद थे। इसके अलावा डिनर टेबल पर राजा के सबसे छोटे भाई अपनी पत्नी और बच्चों के साथ, राजा की तीन बहनें और एक जीजा, राजकुमारी श्रुति के पति, और राजा के दो कज़िन भी मौजूद थे। राजा के अगले छोटे भाई, प्रिंस ज्ञानेंद्र, वहाँ नहीं थे, लेकिन उनकी पत्नी, तीन बेटियाँ, और दामाद भी मौजूद थे।

Nepal Royal Massacre: Royat family tree of Nepal Royal
Nepal Royal Massacre story: Royat family tree of Nepal Royal Family

शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, प्रिंस दीपेंद्र नशे में डिनर में आए थे। चश्मदीदों के अनुसार, वह लड़खड़ा रहे थे, इसलिए उनके छोटे भाई प्रिंस निरजन और चचेरे भाई पारस ने उन्हें उनके कमरे तक छोड़ दिया। अधिकारियों को बाद में पता चला कि कमरे में जाकर दीपेंद्र ने अपनी गर्लफ्रेंड देवयानी राणा को तीन बार फोन किया। उनकी बोली लड़खड़ा रही थी, लेकिन तीसरी बातचीत में उसने कहा कि वह सोने जा रहा है।

लेकिन वह सोया नहीं। प्रिंस दीपेंद्र आर्मी की वर्दी पहनकर और तीन बंदूकें लेकर अपने बेडरूम से बाहर निकला, जिनमें से एक M16 असॉल्ट राइफल थी। महल के एक असिस्टेंट ने उसे सीढ़ियों पर देखा भी, लेकिन उसने रोका नहीं क्योंकि दीपेंद्र को बंदूकों का शौक था। डिनर पार्टी नारायणहिती पैलेस के बिलियर्ड रूम में चल रही थी। चूंकि यह एक प्राइवेट इवेंट था, इसलिए वहां कोई गार्ड मौजूद नहीं था।

वो रात जब प्रिंस दीपेंद्र ने खत्म कर दिया अपना ही वंश!

कमरे में घुसते ही दीपेंद्र ने सबसे पहले अपने पिता, राजा बीरेंद्र पर गोली चलाई। गोलियों की आवाज़ सुनकर भगदड़ मच गई। महल के साथियों ने कांच का दरवाज़ा तोड़कर दूसरों को बचाने की कोशिश की, लेकिन गोलीबारी नहीं रुकी। पिता और अन्य रिश्तेदारों को मारने के बाद, दीपेंद्र बगीचे में अपनी माँ को ढूंढने निकला। वहां एक दिल दहला देने वाला पल आया। कहा जाता है कि उसके छोटे भाई निरजन ने दीपेंद्र से गुज़ारिश की:

“ऐसा मत करो, प्लीज़। अगर तुम चाहो तो मुझे मार दो।”

दीपेंद्र पर खून सवार था। उसने अपने छोटे भाई को गोली मारी और फिर अपनी माँ, महारानी ऐश्वर्या की भी हत्या कर दी। जब उसने 9 लोगों को मार दिया, तब उसके चाचा ने आगे बढ़कर कहा, “तुमने बहुत नुकसान कर दिया है, अब बंदूक दे दो।” जवाब में दीपेंद्र ने उन्हें भी गोली मारकर घायल कर दिया। चंद मिनटों के अंदर, नेपाल का पूरा शाही वंश खून से लथपथ फर्श पर पड़ा था। अंत में, दीपेंद्र एक छोटे पुल पर गया और खुद को भी गोली मार ली।

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Nepal Royal Massacre के बाद क्या हुआ?

इस घटना का सबसे अजीब और विडंबनापूर्ण पहलू इसके तुरंत बाद घटित हुआ। दीपेंद्र ने खुद को गोली मारी थी, लेकिन उनकी मौत तुरंत नहीं हुई। वे कोमा में चले गए। नेपाल के संविधान के मुताबिक, राजा की मौत के बाद क्राउन प्रिंस ही राजा बनता है। अस्पताल के बिस्तर पर कोमा में पड़े दीपेंद्र को नेपाल का नया राजा घोषित किया गया और प्रिंस ज्ञानेंद्र (जो उस वक्त वहां नहीं थे) को रीजेंट (कार्यवाहक) बनाया गया।

Nepal Royal Masscare Story: Narayanhiti Palace Kathmandu Crime Scene
Nepal Royal Massacre Story: Narayanhiti Palace Kathmandu Crime Scene

शुरुआत में ज्ञानेंद्र ने बयान दिया कि मौतें “ऑटोमैटिक हथियार के गलती से चले जाने” की वजह से हुईं। बाद में उन्होंने सफाई दी कि यह बयान “कानूनी और संवैधानिक रुकावटों” की वजह से दिया गया था, क्योंकि अगर दीपेंद्र बच जाता तो राजा होने के नाते उस पर हत्या का आरोप नहीं लगाया जा सकता था। जांच में दीपेंद्र को ही दोषी पाया गया। लेकिन उनका राज सिर्फ 56 घंटे चला। 4 जून 2001 को दीपेंद्र की मौत हो गई और उनके चाचा ज्ञानेंद्र बीर बिक्रम शाह को नया राजा बनाया गया।

नेपाल शाही नरसंहार की कहानी एक युग का अंत था

इस हत्याकांड ने नेपाल की जनता को झकझोर दिया। लोग मानने को तैयार ही नहीं थे कि उनका चहेता प्रिंस अपने माता-पिता की हत्या कर सकता है। सड़कों पर दंगे भड़क उठे। चूंकि उस डिनर में ज्ञानेंद्र मौजूद नहीं थे और उनका बेटा पारस चमत्कारिक रूप से बच गया था, इसलिए जनता ने इसे ज्ञानेंद्र की साजिश माना। हालांकि, आधिकारिक जांच आयोग ने दीपेंद्र को ही दोषी ठहराया।

लेकिन इस एक घटना से नेपाल मे राजनीतिक अस्थिरता का जन्म हुआ। राजा बीरेंद्र एक उदार राजा थे, जिन्होंने लोकतंत्र को जगह दी थी। लेकिन उनकी मौत के बाद माओवादी आंदोलन तेज हो गया। राजा ज्ञानेंद्र स्थिति को संभाल नहीं पाए और जनता का भरोसा खो बैठे और अंततः 2008 में नेपाल से राजशाही खत्म हो गई और वह एक गणतंत्र बन गया।

नारायणहिती पैलेस आज एक म्यूजियम बन चुका है। जिन दीवारों पर गोलियों के निशान थे, उन्हें रिनोवेट कर दिया गया है, लेकिन नेपाल के इतिहास पर लगा वह घाव आज भी हरा है। 1 जून 2001 की उस रात ने साबित कर दिया कि सत्ता और प्रेम का टकराव जब हद से गुजर जाता है, तो वह न रिश्तों को पहचानता है और न ही राजमुकुट की गरिमा को। एक डिनर टेबल पर शुरू हुई वह बहस, एक पूरे युग के अंत का कारण बन गई।

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