किस्सा 1971 का: जब ‘इंदिरा गांधी’ की आवाज़ निकाल SBI से ठग लिए 60 लाख रुपये

भारत के इतिहास में जब भी ‘महाठग’ का जिक्र होता है, तो सबसे पहले नटवरलाल का नाम याद आता है। जिसने फर्जी हस्ताक्षर करके कभी ताजमहल बेच दिया, तो कभी लाल किला और राष्ट्रपति भवन तक का सौदा कर डाला। लेकिन 1971, एक शख्स ने देश की सबसे ताकतवर प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की ऐसी आवाज निकाली जिसने न सिर्फ सिर्फ एक ‘फोन कॉल’ के दम पर सरकारी खजाने को खुलवा दिया बल्कि स्टेट बैंक के मैनेजर ने बिना किसी चेक या रसीद के 60 लाख रुपये उसके हवाले कर दिए, उस दौर में 60 लाख की कीमत आज के करोड़ों रुपये के बराबर थी। यह कहानी है नागरवाला कांड (Nagarwala Scandal 1971) की, जिसने 1970 के दशक में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से लेकर पूरे देश की संसद तक को हिलाकर रख दिया था।

यह किस्सा है 1971 का जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर था और भारत सरकार गुप्त रूप से वहां के विद्रोहियों की मदद कर रही थी। भारत सरकार गुप्त रूप से ‘मुक्ति वाहिनी‘ की मदद कर रही थी।

जब बैंक मैनेजर के पास आया ‘PMO’ से फोन

सरकारी गलियारों और बड़े अधिकारियों के बीच यह बात आम थी कि ‘देशहित’ और ‘गुप्त मिशन’ के नाम पर अक्सर बिना कागजी कार्रवाई के पैसों का लेन-देन होता है। खुफिया एजेंसी R&AW (रॉ) सक्रिय थी और अपने सीक्रेट ऑपरेशन्स मे जुटे थे। बैंक के अधिकारियों को भी शायद आदत रही होगी कि ‘ऊपर’ से फोन आने पर सवाल नहीं किए जाते। इसी नाजुक माहौल का फायदा एक शातिर ठग ने उठाया।

24 मई की दोपहर, बैंक में कामकाज सामान्य था तभी SBI के चीफ कैशियर वेद प्रकाश मल्होत्रा के टेबल पर फोन की घंटी बजी। फोन उठाने पर दूसरी तरफ से एक शख्स ने भारी आवाज में कहा— “मैं पीएमओ से प्रधान सचिव पीएन हक्सर बोल रहा हूं।” फोन करने वाले ने कहा, “प्रधानमंत्री को बांग्लादेश में एक गुप्त अभियान के लिए 60 लाख रुपये चाहिए। उन्होंने मल्होत्रा को निर्देश दिए कि वो बैंक से 60 लाख रुपये निकालें और संसद मार्ग पर ही बाइबल भवन के पास खड़े एक शख़्स को पकड़ा दे। मल्होत्रा ये सब सुन कर थोड़े परेशान से हो गए”

यह भी पढ़ें: जब देव आनंद ने इंदिरा गांधी के विरोध मे बना ली थी अपनी पार्टी!

इंदिरा गांधी की ‘मिमिक्री’ और 60 लाख की मांग

मल्होत्रा कुछ समझ पाते, इससे पहले ही उस शख्स ने कहा, “लीजिए, प्रधानमंत्री जी से बात कीजिए। अगले ही पल दूसरे तरफ फोन कॉल पर एक महिला की आवाज आई। आवाज, लहज़ा और वो रौब बिल्कुल इंदिरा गांधी जैसा था। मल्होत्रा को यकीन हो गया कि ‘माताजी’ (इंदिरा गांधी) खुद लाइन पर हैं।

आवाज ने निर्देश दिया:

“मल्होत्रा जी, यह काम बेहद गुप्त है। आप तुरंत 60 लाख रुपये निकालिए और बैंक की गाड़ी से संसद मार्ग पर स्थित ‘बाइबिल भवन’ पहुंचिए। वहां आपको एक आदमी मिलेगा। वो कोड वर्ड बोलेगा— ‘बांग्लादेश का बाबू’। जवाब में आपको कहना है— ‘बार एट लॉ’ (Bar at Law)। पैसे उसे सौंप दीजिए।”

Nagarwala Scandal 1971 in Hindi: SBI Parliament Street Branch 1971 Sketch
Nagarwala Scandal 1971 in Hindi: SBI Parliament Street Branch 1971 Sketch

बैंक के अंदर की हलचल प्रधानमंत्री का सीधा आदेश मानकर मल्होत्रा ने तुरंत डिप्टी चीफ कैशियर राम प्रकाश बत्रा और एच.आर. खन्ना को बक्से में 60 लाख रुपये भरने को कहा। यह इतनी बड़ी रकम थी, फिर भी डर और दबाव के कारण डिप्टी हेड कैशियर रुहेल सिंह ने रजिस्टर में एंट्री कर दी और मल्होत्रा ने वाउचर पर साइन कर दिए।

‘बांग्लादेश का बाबू’: कोड वर्ड के जरिए हुई पैसों की डिलीवरी

दो चपरासियों ने भारी बक्सा बैंक की गाड़ी में रखवाया और मल्होत्रा खुद गाड़ी चलाकर बाइबिल भवन की ओर निकल पड़े। बाइबिल भवन के पास मल्होत्रा को एक लंबा-चौड़ा, गोरा रुस्तम सोहराब नागरवाला नाम का शख्स खड़ा मिला। उसने पास आते ही वही कोड वर्ड बोला जो फोन कॉल पर बताया गया था “बांग्लादेश का बाबू।” मल्होत्रा ने जवाब दिया— “बार एट लॉ।” कोड मैच होते ही मल्होत्रा का शक खत्म हो गया।

नागरवाला बैंक की गाड़ी में बैठ गया और उन्होंने गाड़ी टैक्सी स्टैंड लेकर चलने को कहा। वहां नागरवाला ने पैसों का बक्से अपनी टैक्सी में रखवाया और मल्होत्रा से कहा: “अब आप सीधे प्रधानमंत्री आवास जाइए और वहां से इस रकम का वाउचर ले लीजिए। नागरवाला वहां से रफूचक्कर हो गया और मल्होत्रा रसीद लेने पीएम हाउस की तरफ मुड़ गए।

nagarwala-scandal-1971: Indira Gandhi Prime Minister of India 1970s
Nagarwala Scandal 1971: Indira Gandhi with P.N. Haxer

जब पी.एन. हक्सर ने कहा- ‘मैंने कोई फोन नहीं किया

मल्होत्रा जब प्रधानमंत्री आवास पहुंचे, तो उन्हें पता चला कि इंदिरा गांधी संसद में हैं। वे वहां नहीं मिले, लेकिन उनकी मुलाकात प्रधान सचिव पी.एन. हक्सर से हो गई। मल्होत्रा ने जब हक्सर को बताया कि “माताजी के कहने पर मैंने 60 लाख रुपये दे दिए हैं, मुझे वाउचर चाहिए,” तो पी.एन. हक्सर सन्न रह गए। उन्होंने साफ किया कि ऐसा कोई फोन नहीं किया। न ही प्रधानमंत्री ने पैसे मंगवाए हैं।

मल्होत्रा के होश उड़ गए। उन्होंने तुरंत संसद मार्ग थाने में एफआईआर दर्ज कराई। मामला सीधे प्रधानमंत्री के नाम से जुड़ा था, इसलिए दिल्ली पुलिस के हाथ-पांव फूल गए। तुरंत शहर भर में नाकेबंदी कर दी गई। यह शायद भारत के इतिहास की सबसे तेज जांच थी। पुलिस ने उसी दिन शाम तक रुस्तम सोहराब नागरवाला को एक पारसी धर्मशाला से गिरफ्तार कर लिया। हैरत की बात यह थी कि उसने भागने की ज्यादा कोशिश भी नहीं की थी और पुलिस ने लगभग पूरे पैसे (59 लाख 95 हजार रुपये) बरामद कर लिए। और नागरवाला ने भी कबूल कर लिया कि उसने ही अपनी आवाज बदलकर इंदिरा गांधी और प्रधान सचिव की नकल की थी।

यह भी पढ़ें: जब पेट्रोल महंगा होने पर बैलगाड़ी से संसद पहुंचे थे अटल बिहारी वाजपेयी!

Nagarwala Scandal 1971 में गिरफ्तारी के बाद क्या हुआ

गिरफ्तारी के महज तीन दिनों के भीतर, नागरवाला को दोषी करार देकर 4 साल की सजा सुना दी गई। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। सजा काटने के दौरान नागरवाला ने इंटरव्यू देने की इच्छा जताई थी, लेकिन 2 मार्च 1972 को, अपने 51वें जन्मदिन के दिन, जेल के अस्पताल में संदिग्ध परिस्थितियों में दिल का दौरा पड़ने से नागरवाला की मौत हो गई। वही इस मामले की जांच करने वाले और पैसे बरामद करने वाले तेज-तर्रार पुलिस अधिकारी डी.के. कश्यप की भी कुछ समय बाद एक रहस्यमयी सड़क हादसे में मौत हो गई। इन दो मौतों ने इस कांड को हमेशा के लिए साजिशों के घेरे में ला खड़ा किया।

Nagarwala Scandel 1971: Arrest of Rustam Sohrab Nagarwala
Nagarwala Scandal 1971: Arrest of Rustam Sohrab Nagarwala

नागरवाला कांड (Nagarwala Scandal 1971) भारतीय राजनीति और अपराध जगत का एक ऐसा अध्याय है जिसके पन्ने आज भी धुंधले हैं। नागरवाला कांड आज भी एक पहेली है। 1977 में जनता पार्टी सरकार ने ‘जगनमोहन रेड्डी आयोग’ बनाकर जांच करवाई, लेकिन कोई नया सच सामने नहीं आ सके। सच्चाई चाहे जो हो, लेकिन एक बात तय है उस दिन संसद मार्ग पर जो हुआ, उसने यह साबित कर दिया कि भारत में ‘सत्ता की हनक’ और ‘आवाज का जादू’ बैंक के लॉकर भी खुलवा सकता है। रुस्तम नागरवाला अपनी मौत के साथ इस राज को भी अपने साथ ले गया।

Join WhatsApp Channel

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot this week

छत्रपति शिवाजी महाराज: जीवनी, युद्ध, प्रशासन और मराठा साम्राज्य

छत्रपति शिवाजी महाराज भारतीय इतिहास के महानतम योद्धाओं और...

ताशकंद समझौता: 1966 के भारत-पाक शांति समझौते का इतिहास और शास्त्री जी की मृत्यु

ताशकंद में शांति समझौता दक्षिण एशिया के इतिहास में...

आर्यभट्ट: प्राचीन भारत के महान गणितज्ञ और खगोलशास्त्री का जीवन व योगदान

आर्यभट्ट (aryabhatta) प्राचीन भारत के विख्यात एवं महान गणितज्ञ,...

स्वामी विवेकानन्द: जीवन परिचय, विचार और भारत के लिए योगदान

स्वामी विवेकानन्द का जन्म कोलकाता के एक सम्पन्न परिवार...

किस्सा 2001 का: जब एक रात डिनर टेबल पर खत्म हो गया पूरा नेपाल का राजघराना

दुनिया के इतिहास में तख्तापलट बहुत हुए हैं, राजाओं...

कैसे एक कवयित्री बनी भारत की पहली महिला राज्यपाल? सरोजिनी नायडू की कहानी

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में कुछ नाम ऐसे...

Related Articles

Popular Categories