कुइली रानी वेलु नचियार के ऐसे सेनापति थी जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध में अंग्रेजों के हथियार डिपो को नष्ट करने के लिए खुद को आग लगाकर अंग्रेजों के मुख्य गोला-बारूद के गोदाम में कूद गईं। यह इतिहास में दर्ज पहला सुसाइड अटैक भी माना जाता है।
रानी वेलु नचियार भारत के इतिहास की वो महान वीरांगना हैं, जिन्हें अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध करने वाली पहली भारतीय रानी माना जाता है। उन्होंने 1857 की क्रांति से लगभग 75 साल पहले ही ब्रिटिश हुकूमत को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था। तमिल लोग उन्हें आदर से “वीरमंगई” अर्थात बहादुर महिला कहते हैं।
रानी वेलु नचियार का जन्म और शुरुआती जीवन
रानी वेलु नचियार का जन्म सन् 1730 में रामनाथपुरम, तमिलनाडु के राजा चेल्लामुथु विजयरागुनाथ सेतुपति के यहाँ हुआ था। राजा की कोई संतान नहीं थी, इसलिए उन्होंने वेलु को एक बेटे की तरह पाला। उन्हें घुड़सवारी, तीरंदाजी, मार्शल आर्ट्स (सिलंबम और वलयरी) जैसी युद्ध कलाओं में निपुण किया गया ,वह सिर्फ युद्ध में ही नहीं, बल्कि पढ़ाई में भी तेज थीं।
उन्हें तमिल, अंग्रेजी, फ्रेंच और उर्दू जैसी कई भाषाओं का गहरा ज्ञान था। वेलु नचियार का विवाह शिवगंगा के राजा मुथु वडुगनाथ पेरियाउदैया थेवर से हुआ।

अंग्रेजों का हमला और शिवगंगा की त्रासदी
लेकिन 1772 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने नवाब के साथ मिलकर शिवगंगा पर अचानक हमला कर दिया, जिसे ‘कालेयार कोविल युद्ध’ कहा जाता है| पति की मौत के बाद रानी वेलु नचियार अपनी बेटी के साथ वहाँ से सुरक्षित निकल गईं। उन्होंने डिंडिगल के पास विरुपाक्षी में शरण ली। अगले 8 साल उन्होंने कोई साधारण जीवन नहीं जिया, बल्कि वो अंग्रेजों से अपनी मातृभूमि वापस छीनने की तैयारी करती रहीं।
रानी ने अपनी उर्दू भाषा के ज्ञान का इस्तेमाल करके मैसूर के सुल्तान हैदर अली से मुलाकात की। हैदर अली उनकी बहादुरी और रणनीति से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने रानी को 5,000 सैनिक और तोपें देने का वादा किया। रानी ने महिलाओं की एक खतरनाक सेना टुकड़ी तैयार की, जिसका नाम उन्होंने अपनी वफादार साथी ‘कुइली’ के नाम पर रखा था।
इतिहास का पहला आत्मघाती हमला
साल 1780 में जब रानी ने शिवगंगा पर दोबारा कब्जा करने के लिए हमला किया, तो अंग्रेजों के पास भारी मात्रा में गोला-बारूद था। तब रानी की सेनापति कुइली ने खुद को घी और तेल में भिगोया, आग लगाई और अंग्रेजों के मुख्य गोला-बारूद के गोदाम में कूद गईं। यह इतिहास में दर्ज पहला सुसाइड अटैक माना जाता है। सारा गोला-बारूद तबाह हो गया और अंग्रेजों की रीढ़ टूट गई।
इस भयंकर युद्ध में रानी वेलु नचियार ने अंग्रेजों और नवाब की संयुक्त सेना को पूरी तरह खदेड़ दिया। उन्होंने अपना खोया हुआ राज्य ‘शिवगंगा’ वापस जीत लिया और दोबारा वहाँ की रानी बनीं। उन्होंने करीब 10 साल और शासन किया और सन् 1796 में रानी वेलु नचियार का निधन हुआ, लेकिन उनकी वीरगाथा आज भी भारतीय इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में दर्ज है।
रानी वेलु नचियार क्यों हैं खास?
- 1857 की क्रांति से 75 साल पहले ही अंग्रेजों के खिलाफ खुला युद्ध छेड़ने वाली पहली भारतीय रानी थी।
- तमिलनाडु में “वीरमंगई” (बहादुर स्त्री) की उपाधि से सम्मानित किया गया।
- हैदर अली के साथ रणनीतिक गठबंधन बनाने वाली दूरदर्शी शासिका
- उनकी सेनापति कुइली का बलिदान इतिहास का पहला दर्ज आत्मघाती हमला माना जाता है।
- महिलाओं की स्वतंत्र सैन्य टुकड़ी बनाने वाली शुरुआती भारतीय शासिक में से एक
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. रानी वेलु नचियार कौन थीं?
रानी वेलु नचियार शिवगंगा रियासत (तमिलनाडु) की रानी थीं, जिन्हें अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध लड़ने वाली पहली भारतीय रानी माना जाता है।
2. रानी वेलु नचियार को वीरमंगई क्यों कहा जाता है?
उनकी असाधारण वीरता और अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष के कारण तमिल समाज उन्हें आदर से “वीरमंगई” यानी बहादुर स्त्री कहता है।
3. कुइली कौन थीं?
कुइली रानी वेलु नचियार की वफादार सेनापति थीं, जिन्होंने खुद को आग लगाकर अंग्रेजों के गोला-बारूद डिपो में कूदकर उसे नष्ट कर दिया — यह इतिहास का पहला दर्ज आत्मघाती हमला माना जाता है।
4. रानी वेलु नचियार ने अंग्रेजों को कब हराया था?
सन् 1780 में रानी वेलु नचियार ने अपने खोए राज्य शिवगंगा को वापस जीतते हुए अंग्रेजों और नवाब की संयुक्त सेना को पराजित किया था।
5. रानी वेलु नचियार का निधन कब हुआ?
रानी वेलु नचियार का निधन 1796 में हुआ, इससे पहले उन्होंने करीब 10 साल तक शिवगंगा पर शासन किया।

