भारतीय राजनीति के इतिहास में कुछ नाम ऐसे होते हैं जो किसी पार्टी या विचारधारा से ऊपर उठकर पूरे देश की धरोहर बन जाते हैं। 50 सालों तक राजनीति के कीचड़ में रहकर भी जिनका दामन हमेशा बेदाग रहा, वो थे अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee Biography)। एक कवि हृदय, एक प्रखर वक्ता और एक ऐसा राजनेता जिसका विरोधी भी सम्मान करते थे—उन्हें ‘अजातशत्रु’ (जिसका कोई शत्रु न हो) कहा जाता था।
यह कहानी सिर्फ एक प्रधानमंत्री की नहीं है, बल्कि उस संकल्प की है जिसने संसद में खड़े होकर कहा था— “सरकारें आएंगी, जाएंगी, पार्टियां बनेंगी, बिगड़ेंगी, मगर यह देश रहना चाहिए, इस देश का लोकतंत्र अमर रहना चाहिए।” 50 सालों के अपने राजनीतिक सफर में उन्होंने शून्य से शिखर तक का सफर तय किया। 2 सांसदों वाली पार्टी को 200 के पार पहुँचाना और 24 दलों के गठबंधन को 5 साल तक सफलतापूर्वक चलाना—यह करिश्मा सिर्फ अटल जी ही कर सकते थे।
ग्वालियर की गलियों से शुरू हुआ कवि और सियासत का सफर
कहानी शुरू होती है 25 दिसंबर 1924 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक साधारण मध्यमवर्गीय ब्राह्मण परिवार में अटल जी का जन्म हुआ था। उनके पिता कृष्णा बिहारी वाजपेयी एक स्कूल मास्टर और कवि थे, और माता कृष्णा देवी एक गृहणी थीं। इसलिए घर में साहित्य और कविताओं का बचपन से ही माहौल था, जिसने बालक अटल के कोमल मन में शब्दों के बीज बो दिए। उनकी शुरुआती पढ़ाई ग्वालियर के गोरखी स्कूल से हुई, जहाँ वे अपनी कुशाग्र बुद्धि के लिए जाने जाते थे।
हिंदी, अंग्रेजी और संस्कृत में ‘डिस्टिंक्शन’ के साथ पास होने वाले अटल ने आगे चलकर कानपुर के डीएवी कॉलेज से राजनीति विज्ञान (Political Science) में एम.ए. किया। बहुत कम लोग जानते हैं कि वे लॉ (Law) की पढ़ाई कर रहे थे, लेकिन देश में विभाजन की आग और दंगों को देखकर उन्होंने अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी और खुद को पूरी तरह से राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित कर दिया।

Atal Bihari Vajpayee Political Career: संघर्ष और नेहरू की भविष्यवाणी
अटल जी का राजनीतिक सफर आसान नहीं था। वाजपेयी जी का राजनीतिक सफर 1957 में शुरू हुआ, जब उन्होंने पहली बार संसद में कदम रखा, उस समय वे एक युवा और तेज़-तर्रार वक्ता थे। उस दौर में देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू भी उनके भाषणों के कायल हो गए थे। कहा जाता है कि नेहरू जी ने एक विदेशी मेहमान से अटल जी का परिचय करवाते हुए भविष्यवाणी की थी— “देखना, यह युवा लड़का एक दिन भारत का प्रधानमंत्री बनेगा।” और वक्त ने इस बात को सच साबित किया।
लेकिन यह सफर कांटों भरा था। 1975 में आपातकाल (Emergency) के दौरान उन्हें जेल में डाला गया। फिर 1980 में उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नींव रखी। एक वक्त ऐसा भी आया जब 1984 के चुनाव में उनकी पार्टी सिर्फ 2 सीटों पर सिमट गई थी। लोग मजाक उड़ाते थे, लेकिन अटल जी ने अपनी प्रसिद्ध कविता के जरिए जवाब दिया— “हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा, काल के कपाल पर लिखता मिटाता हूँ, गीत नया गाता हूँ।”
13 दिन की सरकार और पोखरण का परमाणु धमाका
अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन का सबसे रोमांचक अध्याय उनका प्रधानमंत्री बनना रहा। वे तीन बार इस पद पर आसीन हुए। 1996 में पहली बार जब वे पीएम बने, तो उनकी सरकार महज 13 दिन चल पाई क्योंकि वे बहुमत साबित नहीं कर सके। लेकिन उस दिन संसद में दिया गया उनका भाषण आज भी इतिहास में दर्ज है। इसके बाद 1998 में वे दोबारा लौटे, और इस बार उन्होंने दुनिया को चौंका दिया। अमेरिका की धमकियों और खुफिया एजेंसियों की नाक के नीचे, उन्होंने राजस्थान के पोखरण में परमाणु परीक्षण (Nuclear Test) कर भारत को एक परमाणु शक्ति संपन्न देश बना दिया। उन्होंने दुनिया को दिखा दिया कि भारत अब किसी के सामने झुकेगा नहीं। हालांकि, यह सरकार भी दुर्भाग्यवश सिर्फ 13 महीने मे ही सिर्फ 1 वोट से गिर गई, लेकिन अटल जी ने अपनी नैतिकता से समझौता नहीं किया।

कारगिल विजय और पाकिस्तान को धूल चटाना
लेकिन जब तीसरी बार, 1999 में वे पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में लौटे और अपना 5 साल का कार्यकाल पूरा करने वाले पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री बने। इसी दौरान पाकिस्तान ने धोखे से कारगिल की चोटियों पर कब्जा कर लिया था। अटल जी, जो हमेशा शांति के पक्षधर थे और खुद बस लेकर लाहौर गए थे, उन्होंने पाकिस्तान की इस पीठ में छुरा घोंपने वाली हरकत का करारा जवाब दिया। ‘ऑपरेशन विजय’ के तहत भारतीय सेना ने पाकिस्तान को धूल चटा दी और कारगिल में तिरंगा फहराया।
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अटल बिहारी वाजपेयी के वो फैसले जिन्होंने भारत की तकदीर बदल दिया
अटल बिहारी वाजपेयी सिर्फ एक कवि हृदय राजनेता नहीं थे, बल्कि वक्त आने पर वे चट्टान की तरह सख्त भी हो जाते थे। उनके प्रधानमंत्री रहते हुए भारत ने कुछ ऐसे बदलाव देखे, जिन्होंने देश को एक महाशक्ति बनने की राह पर खड़ा कर दिया।
1. पोखरण परमाणु परीक्षण (1998)
अटल जी का पहला महत्वपूर्ण साल 1998 मे लिया हुआ फ़ैसला है। भारत राजस्थान के पोखरण मे परमाणु परीक्षण (Pokhran Nuclear Test 1998) कर रहा था उस समय अमेरिका और उसकी खुफिया एजेंसी CIA की सैटेलाइट्स भारत पर चौबीसों घंटे नज़र गड़ाए बैठी थीं। लेकिन अटल जी ने ठान लिया था कि भारत को अब परमाणु शक्ति बनना ही होगा। बेहद गोपनीयता के साथ, 11 और 13 मई को राजस्थान के पोखरण में 5 परमाणु धमाके किए गए। इसे ‘ऑपरेशन शक्ति’ नाम दिया गया। जैसे ही दुनिया को पता चला, अमेरिका और पश्चिमी देशों ने भारत पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए। लेकिन अटल जी डरे नहीं। उन्होंने संसद में सीना तान कर कहा— “हम अपनी सुरक्षा के साथ समझौता नहीं करेंगे, चाहे दुनिया कुछ भी कर ले।” इसी दिन उन्होंने ‘जय जवान, जय किसान’ के साथ ‘जय विज्ञान’ का नारा जोड़कर भारत को एक नए युग में प्रवेश कराया।
2. कारगिल विजय (Kargil War Operation Vijay-1999)
अटल जी हमेशा शांति के दूत रहे। वे खुद बस में बैठकर पाकिस्तान (लाहौर) गए थे ताकि दोस्ती का हाथ बढ़ाया जा सके। लेकिन पाकिस्तान ने धोखे से कारगिल की चोटियों पर कब्जा कर लिया। जब दोस्ती के बदले धोखा मिला, तो अटल जी ने युद्ध का ऐलान कर दिया। उन्होंने भारतीय वायुसेना और थल सेना को खुली छूट दी। अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद, अटल जी ने साफ कर दिया था कि जब तक पाकिस्तान का आखिरी सैनिक हमारी ज़मीन से वापस नहीं जाता, युद्ध नहीं रुकेगा। ‘ऑपरेशन विजय’ की सफलता ने न केवल पाकिस्तान को घुटने टेकने पर मजबूर किया, बल्कि दुनिया को दिखा दिया कि भारत शांति चाहता है, लेकिन अपनी शर्तों पर।
3. स्वर्णिम चतुर्भुज योजना (Golden Quadrilateral)
अटल जी का मानना था कि “विकास का रास्ता सड़कों से होकर गुज़रता है।” उन्होंने स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना शुरू की, जिसका लक्ष्य भारत के चार प्रमुख महानगरों— दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई को 4 और 6 लेन वाली वर्ल्ड क्लास सड़कों से जोड़ना था। यह उस समय भारत का सबसे बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट था। आलोचकों ने कहा था कि इतना पैसा कहाँ से आएगा, लेकिन अटल जी ने इसे मुमकिन कर दिखाया और भारत की अर्थव्यवस्था को नई रफ़्तार दी।
4. दिल्ली मेट्रो (Delhi Metro)
आज दिल्ली की लाइफलाइन कही जाने वाली ‘मेट्रो‘ की असल शुरुआत अटल जी के विजन और जिद का ही नतीजा थी। उस दौर में लालफीताशाही और फाइलों के बोझ तले प्रोजेक्ट्स दब जाते थे। लेकिन अटल जी ने निजी दिलचस्पी लेकर दिल्ली मेट्रो प्रोजेक्ट को रफ़्तार दी। 2002 में उन्होंने खुद कश्मीरी गेट पर पहली मेट्रो लाइन का उद्घाटन किया और उसमें सफर भी किया। उनका सपना था कि भारत के शहर भी लंदन और न्यूयॉर्क की तरह आधुनिक बनें। आज दिल्ली मेट्रो की सफलता उसी दूरदर्शी सोच का परिणाम है।
5. सर्व शिक्षा अभियान: ‘स्कूल चलें हम’
अटल जी जानते थे कि असली भारत तब तक आगे नहीं बढ़ सकता जब तक देश का हर बच्चा स्कूल नहीं जाएगा। उन्होंने शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाने के लिए संविधान में संशोधन (86वां संशोधन) किया। उन्होंने ‘सर्व शिक्षा अभियान’ लॉन्च किया, जिसका वो मशहूर गीत “स्कूल चलें हम…” और पेंसिल पर बैठे दो बच्चों का लोगो (Logo) आज भी उस अभियान की गवाही देता है। इस योजना ने करोड़ों गरीब बच्चों को, खासकर लड़कियों को स्कूल की दहलीज तक पहुँचाया और भारत में साक्षरता दर को बढ़ाने में क्रांतिकारी भूमिका निभाई।
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अटल बिहारी वाजपेयी का व्यक्तिगत जीवन
अटल बिहारी वाजपेयी ने देश सेवा के लिए अपना निजी जीवन भी कुर्बान कर दिया। अटल बिहारी वाजपेयी ने कभी शादी नहीं की, वे आजीवन अविवाहित रहे। लेकिन उन्होंने एक बेटी, नमिता को गोद लिया था। अटल जी को सादगी पसंद थी। राजनीति के अलावा उनकी पहचान एक कवि के रूप में भी थी। उनकी कविताएं जैसे “दूध में दरार पड़ गई”, “कदम मिलाकर चलना होगा” आज भी युवाओं को प्रेरणा देती हैं। “मेरी इक्यावन कविताएँ” उनकी मशहूर रचना में से एक है।

साल 2009 में ब्रेन स्ट्रोक के बाद उनका स्वास्थ्य बिगड़ने लगा था। वे डिमेंशिया (Dementia) से ग्रसित हो गए थे और सार्वजनिक जीवन से दूर हो गए। 16 अगस्त 2018 को दिल्ली के AIIMS अस्पताल में 93 वर्ष की आयु में इस महामानव ने अंतिम सांस (Death of Atal Bihari Vajpayee) ली। उनकी मृत्यु पर न सिर्फ पूरा देश रोया, बल्कि पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान ने भी शोक व्यक्त किया। यह उनकी शख्सियत का ही असर था। 2015 में उन्हें देश के सर्वोच्च सम्मान ‘भारत रत्न‘ से सम्मानित (Bharat Ratna Atal Bihari Vajpayee) किया गया। उनका जन्मदिन (25 दिसंबर) अब भारत में ‘सुशासन दिवस’ (Good Governance Day) के रूप में मनाया जाता है। आज वे हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके विचार और उनका यह वाक्य हमेशा गूंजता रहेगा— “टूट सकते हैं, मगर हम झुक नहीं सकते।”

