
ज़मीन पर चलने वाले अक्सर आसमान में उड़ने का सपना देखते हैं, लेकिन कुछ जिद्दी लोग ऐसे होते हैं जो उस आसमान को अपनी मुट्ठी में कर लेते हैं। यह कहानी किसी अरबपति खानदान के वारिस की नहीं है, बल्कि उस शख्स की है जिसने कभी उत्तर प्रदेश के कानपुर की धूल भरी गलियों में टेंपो चलाया, बसों में धक्के खाए और एक आम आदमी का जीवन जिया, वही शख्स आज देश के आसमान में अपनी खुद की एयरलाइन (Airline) उड़ाने की तैयारी में है। हम बात कर रहे हैं— श्रवण कुमार विश्वकर्मा (Shankh Airlines Owner Shravan Vishwakarma Story) की, जो यूपी से निकलकर भारत के एविएशन सेक्टर में एक नई क्रांति लाने वाले हैं।
उन्होंने एक सपना देखा था: “हवाई चप्पल पहनने वालों को हवाई जहाज का सफर कराना।” और अब, उनका यह सपना हकीकत बनने जा रहा है। उनकी कंपनी ‘शंख एयरलाइंस’ (Shankh Airlines) को सरकार से हरी झंडी मिल चुकी है। आइए जानते हैं फर्श से अर्श तक के इस सफर की पूरी कहानी।
कौन हैं श्रवण कुमार विश्वकर्मा (Shravan Vishwakarma Story)?
श्रवण कुमार विश्वकर्मा का ताल्लुक कानपुर, उत्तर प्रदेश से है। एक साधारण मध्यम वर्गीय परिवार में जन्मे श्रवण पढ़ाई-लिखाई में बहुत तेज नहीं थे। उनका मन किताबों में कम और दुनियादारी में ज्यादा लगता था, जिसके कारण उनकी शिक्षा जल्दी छूट गई। लेकिन डिग्री न होने का मतलब यह नहीं था कि उनके पास विजन नहीं था।

उन्होंने खुद को बिजनेस की दुनिया में झोंक दिया। शुरुआत में लोहे के सरिये (TMT) का कारोबार किया, फिर सीमेंट और माइनिंग में हाथ आजमाया। लेकिन असली पहचान उन्होंने ट्रांसपोर्ट सेक्टर में बनाई, जहाँ उन्होंने ट्रकों का एक विशाल बेड़ा खड़ा कर दिया। श्रवण कुमार अपने पुराने दिनों को याद करते हुए कहते हैं—
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“नीचे से ऊपर आने वाला आदमी साइकिल, बस, ट्रेन और टेंपो… सब कुछ देखता है। मैंने न सिर्फ टेंपो में सफर किया है, बल्कि दोस्तों के टेंपो खुद चलाए भी हैं।”
उनका यही ज़मीनी अनुभव आज उनकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्हें पता है कि आम आदमी क्या चाहता है।
शंख एयरलाइंस को मिली हरी झंडी (NOC जारी)
श्रवण कुमार के सपनों को पंख तब मिले, जब 24 दिसंबर को नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने उनकी कंपनी ‘शंख एयर’ को नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) जारी कर दिया। यह यूपी की पहली अपनी एयरलाइन होगी। शंख एयरलाइंस के साथ-साथ दो और एयरलाइंस— ‘अल हिंद एयर’ और ‘फ्लाई एक्सप्रेस’ को भी मंजूरी मिली है। लेकिन चर्चा का विषय शंख एयर इसलिए है क्योंकि इसके मालिक की कहानी लाखों युवाओं को प्रेरणा देने वाली है।
एयरलाइन का नाम ‘शंख’ ही क्यों?
जब उनसे पूछा गया कि एयरलाइन का नाम ‘शंख’ क्यों रखा, तो उनका जवाब बहुत ही दिलचस्प और सांस्कृतिक था। वे कहते हैं कि ‘शंख’ भारतीय संस्कृति में एक पवित्र प्रतीक है। “हर घर में शंख होता है, लेकिन हर कोई उसे बजा नहीं पाता। हम भी कुछ ऐसा ही करना चाहते हैं— जो सबके पास हो (सुलभ हो), लेकिन जिसकी पहचान सबसे अलग हो।”
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करीब 3-4 साल पहले उन्हें लगा कि एविएशन सेक्टर में बहुत संभावनाएं हैं। उन्होंने महसूस किया कि हवाई सफर अब लग्जरी नहीं, बल्कि वक्त की जरूरत बन गया है। लेकिन एक आम आदमी के लिए टिकट का दाम आज भी सबसे बड़ी बाधा है। इसी समस्या को दूर करने के लिए ‘शंख एयर’ का जन्म हुआ।

त्योहारों पर नहीं बढ़ेगा किराया (No Dynamic Pricing)
आजकल हम देखते हैं कि दिवाली या छठ पूजा पर हवाई टिकट के दाम 3-4 गुना बढ़ जाते हैं, त्योहारों पर बढ़ते किराए किसी तकनीकी मजबूरी का नहीं, बल्कि उस सोच का नतीजा हैं जहाँ भीड़ को मौका समझा जाता है। लेकिन श्रवण कुमार ने एक ऐसा वादा किया है जो अगर सच हुआ, तो यह गेम-चेंजर साबित होगा। शंख एयरलाइंस ने नो डायनामिक प्राइसिंग का दावा किया है। श्रवण कुमार का स्पष्ट कहना है: “सुबह ₹5,000 की टिकट शाम को ₹25,000 की नहीं होगी।” चाहे होली हो, दिवाली हो या महाकुंभ… मांग बढ़ने पर भी उनकी एयरलाइन का किराया आसमान नहीं छुएगा।
उनका बिज़नेस मॉडल एकदम साफ है— मध्यम वर्ग पर फोकस, फिक्स रेट, सीमित मुनाफा और भरोसेमंद सेवा। यह कहानी सिर्फ एक बिज़नेस लॉन्च की नहीं, बल्कि एक दृढ़ संकल्प की है कि कैसे एक आम आदमी का सपना देश के पूरे एविएशन सेक्टर को चुनौती दे सकता है।

