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क्या यही है इंसाफ है? पढ़ें उन्नाव रेप पीड़िता के संघर्ष की पूरी कहानी (2017-2025)

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“साहब! मुझे इंसाफ चाहिए…” यह चीख 2017 में उत्तर प्रदेश के उन्नाव से उठी थी, और आज 2025 खत्म होते-होते भी यह चीख दिल्ली की सड़कों पर गूंज रही है। क्या हमारे देश में एक गरीब की बेटी के लिए इंसाफ का मतलब सिर्फ तारीखें, अदालती चक्कर और मातम है? उन्नाव रेप केस (Unnao Rape Case) भारतीय न्याय व्यवस्था और राजनीति के इतिहास का वो काला अध्याय है, जिसने दिखा दिया कि जब सत्ता और अपराध का गठजोड़ होता है, तो कानून भी कैसे घुटने टेक देता है।

एक 17 साल की लड़की, जिसे नौकरी का झांसा देकर बुलाया गया और उसकी आबरू लूट ली गई। उसने हार नहीं मानी, लेकिन बदले में उसे मिला – पिता की लाश, रिश्तेदारों की मौत, खुद के शरीर पर कभी न भरने वाले जख्म। और अब, 23 दिसंबर 2025 को आई एक खबर ने उस बेटी के पुराने जख्मों को फिर से हरा कर दिया है।

कहते है जिस व्यवस्था में एक नाबालिग लड़की को इंसाफ़ की माँग के लिए अदालत से ज़्यादा सड़क पर खड़ा होना पड़े, और हर राहत आरोपी के नाम जुड़ती जाए— वहाँ यह मान लेना चाहिए कि समस्या किसी एक केस की नहीं, बल्कि उस सिस्टम की है जो ताक़त को कानून से ऊपर रखता है।

2017: Unnao Rape Case में सिस्टम की चुप्पी

इस खौफनाक दास्तां की शुरुआत 4 जून 2017 को हुई थी। उन्नाव के माखी गांव की एक 17 वर्षीय नाबालिग लड़की नौकरी की तलाश में थी। उसे लगा कि इलाके के रसूखदार विधायक कुलदीप सिंह सेंगर उसकी मदद करेंगे। वह मदद की आस लेकर गई थी, लेकिन वहां उसके भरोसे का कत्ल हुआ। आरोप के मुताबिक, विधायक ने उसका यौन शोषण किया। इसके बाद जब लड़की ने आवाज उठाई, तो स्थानीय पुलिस ने न एफआईआर लिखी, न कोई सुनवाई की। उल्टे, रेप का आरोप लगाने के ठीक एक हफ्ते बाद, 11 जून 2017 को वह संदिग्ध परिस्थितियों में गायब हो गई। कई दिनों बाद जब वह औरैया के एक गांव से मिली, तो परिवार ने साफ आरोप लगाया कि विधायक के गुर्गे उसे धमका रहे हैं और केस वापस लेने का दबाव बना रहे हैं। 2017 का पूरा साल बीत गया, विधायक खुलेआम घूमता रहा और पीड़िता डर के साये में जीती रही। उसने जुलाई 2017 में मुख्यमंत्री को चिट्ठी भी लिखी, लेकिन सिस्टम की नींद नहीं टूटी।

Kuldeep Singh Sengar Convicted MLA Unnao Rape Case Profile
Kuldeep Singh Sengar Convicted MLA Unnao Rape Case Profile

2018: उन्नाव रेप पीड़िता के पिता का पुलिस कस्टडी में ‘हत्या’

सिस्टम की यह चुप्पी तब टूटी जब सब्र का बांध टूट गया। अप्रैल 2018 में इस मामले ने ऐसा मोड़ लिया जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया। 3 अप्रैल 2018 को विधायक के भाई अतुल सिंह ने पीड़िता के पिता को बेरहमी से पीटा। हद तो तब हो गई जब पुलिस ने हमलावरों को पकड़ने के बजाय, लहुलुहान पिता को ही आर्म्स एक्ट के झूठे केस में जेल में डाल दिया। इस अन्याय से टूट चुकी पीड़िता ने 8 अप्रैल 2018 को मुख्यमंत्री आवास के सामने आत्मदाह की कोशिश की। यह उसकी आखिरी पुकार थी।

आत्मदाह की कोशिश के अगले ही दिन, 9 अप्रैल 2018 को पुलिस हिरासत में पीड़िता के पिता की मौत हो गई। यह मौत नहीं, सिस्टम द्वारा की गई हत्या थी। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया और इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 10 अप्रैल 2018 को मामले का संज्ञान लेते हुए जांच सीबीआई (CBI) को सौंप दी। भारी दबाव के बाद 13 अप्रैल 2018 को आखिरकार ‘बाहुबली’ कुलदीप सिंह सेंगर को गिरफ्तार किया गया।

2019: पीड़िता के एक्सीडेंट की साजिश और ऐतिहासिक फैसला

जेल में रहने के बाद भी सेंगर का खौफ कम नहीं हुआ था। 28 जुलाई 2019 को एक और खौफनाक साजिश रची गई। रायबरेली में पीड़िता की कार को एक ट्रक ने जोरदार टक्कर मारी, मीडिया रिपोर्ट की मुताबिक नंबर प्लेट पर कालिख पुती हुई थी। इस ‘हादसे’ में पीड़िता की चाची और मौसी की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पीड़िता और उसके वकील जिंदगी और मौत के बीच झूलते रहे। यह साफ संदेश था कि गवाहों को खत्म किया जा रहा है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए 1 अगस्त 2019 को सभी केस दिल्ली ट्रांसफर कर दिए और एम्स (AIIMS) अस्पताल में ही अस्थाई अदालत लगाकर पीड़िता का बयान दर्ज किया गया।

  • 16 दिसंबर 2019: तीस हजारी कोर्ट ने कुलदीप सेंगर को दोषी करार दिया।
  • 20 दिसंबर 2019: उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई और 25 लाख का जुर्माना लगाया गया। कोर्ट ने कहा— उसे ताउम्र जेल में रहना होगा।”
Unnao Rape Victim Family Protest at India Gate for Justice
Unnao Rape Case Victim Family Protest at India Gate for Justice

Unnao Rape Case में सुप्रीम कोर्ट का नया फ़ैसला

लग रहा था कि न्याय मिल गया है, लेकिन 23 दिसंबर 2025 को आई एक खबर ने उस ‘बेटी’ के जख्मों को फिर से हरा कर दिया। दिल्ली हाईकोर्ट ने रेप के मामले में कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद की सजा को निलंबित (Suspend) करते हुए उसे जमानत दे दी। कोर्ट ने कुछ शर्तें जरूर लगाई हैं कि उसे दिल्ली में रहना होगा, अपनी हाजिरी देनी होगी और पीड़िता से दूर रहना होगा। राहत की बात केवल इतनी है कि सेंगर अभी तुरंत जेल से बाहर नहीं आएगा क्योंकि ‘पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत’ के मामले में उसकी 10 साल की सजा अभी अलग से चल रही है।

लेकिन हाईकोर्ट का यह फैसला पीड़िता और उसके परिवार के लिए किसी सदमे से कम नहीं है। इसी फैसले के विरोध में पीड़िता और उसकी मां ने इंडिया गेट पर प्रदर्शन किया। जिसके बाद 29 दिसंबर 2025 को सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों वाली बेंच ने उन्नाव रेप केस में दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के बेंच ने कहा एक गंभीर सवाल भी खड़े किए कि अगर पॉक्सो ऐक्ट के तहत अगर कॉन्स्टेबल लोक सेवक हो सकता है तो विधायक को अलग क्यों रखा गया, यह चिंता का विषय है। साथ ही सीजेआई ने कहा कि हाई कोर्ट के जिस जज ने फैसला सुनाया है वह बहुत अच्छे जज हैं। हालांकि गलती किसी से भी हो सकती है। आखिरकार न्याय की उम्मीद जगी है।

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