By: Team janbal
सटीक मौसम मापने वाले उपकरण अन्ना मणि ने ही विकसित किए थे। फिर भी विज्ञान के इतिहास में इन्हें वो दर्जा नहीं मिला जो पुरुष साथियों को मिला।
क्या आप जानते हैं कि भारत में मिलने वाली गन्ने की मीठी किस्में जानकी अम्माल ने विकसित की थीं? उन्होंने भारत को चीनी के मामले में आत्मनिर्भर बनाया।
कॉस्मिक किरणों और नए सब-एटॉमिक पार्टिकल्स की खोज में बड़ी भूमिका निभाई। हैरानी की बात है कि रिसर्च के लिए पुरुषों को नोबेल मिला, पर बिभा का नाम छूट गया।
आजादी के समय की हर ऐतिहासिक तस्वीर इनके कैमरे में कैद है। पुरुषों के दबदबे वाली दुनिया में इन्होंने अपनी जगह बनाई। मगर पहचान बहुत देर से मिली जिसकी वह हकदार थीं।
भारत का 'मिशन मंगल' (MOM) पहली ही कोशिश में कामयाब रहा, और इसकी प्लानिंग और एग्जीक्यूशन में रितु करिधाल का अहम योगदान था।
इंजीनियरिंग जब पुरुषों का क्षेत्र था, तब उन्होंने माइक्रोवेव और एंटीना रिसर्च में राह बनाई। उनका काम आज हमारे डिफेंस और कम्युनिकेशन सिस्टम की रीढ़ है।
1942 के 'भारत छोड़ो आंदोलन' के दौरान, उषा मेहता ने एक गुप्त रेडियो स्टेशन चलाया ताकि देशवासियों तक सही जानकारी पहुँच सके। इनका नाम भी इतिहास के पन्नों में पीछे रह गई ।