By: Team janbal
गया के कोठिलवा गांव में पानी की भारी किल्लत थी। खेती बर्बाद हो रही थी और लोग पलायन करने को मजबूर थे।
बारिश का पानी पहाड़ों से बहकर बर्बाद हो जाता था। तब लौंगी भुइयां ने अकेले ही नहर खोदने का फैसला किया।
अपनों का विरोध, दुनिया का मजाक: परिवार ने मना किया, लोगों ने पागल कहा। पर वे रोज सुबह कुदाल उठाकर पहाड़ की ओर निकल पड़ते थे।
30 साल की तपस्या: लगातार 30 वर्षों तक उन्होंने कड़ी मेहनत की। अंत में 3 किलोमीटर लंबी नहर बनकर तैयार हो गई।
आनंद महिंद्रा भी हुए मुरीद: उनके इस निस्वार्थ जुनून को देखकर आनंद महिंद्रा ने उन्हें एक ट्रैक्टर तोहफे में भेंट किया।
70 की उम्र में नया लक्ष्य: वह अभी भी रुके नहीं हैं! अब उन्होंने किसानों के लिए 5 KM लंबी एक और नई नहर खोदने का बीड़ा उठाया है।